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रेल यात्रा के दौरान यात्रियों ने मनाया इस अंदाज में स्वतंत्रता दिवस | Gyansagar ( ज्ञानसागर )



रेल यात्रा के दौरान यात्रियों ने मनाया इस अंदाज में स्वतंत्रता दिवस | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

 जहाँ पूरा देश स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जश्न मना रहा था वही कुछ रेल यात्री जों कि ट्रेन संख्या 12897 ( सियालदह से अजमेर जाने वाली गाड़ी ) में सफर कर रहे थे इसे न मना पाने का अफ़सोस व सोशल मीडिया से सबको संदेश देकर अपनी राष्ट्रभक्ति व जश्न मना रहे थे ! इसी बीच चौबीस वर्षीय पेशे से इंजिनीयर मनोनीत दीप ने प्रत्येक बर्थ में जाकर रेल यात्रियो से सुबह दस बजे राष्ट्रगान,राष्ट्रगीत गाकर व् राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत जयहिंद,वन्देमातरम के नारों से जयकारे लगाने का आह्वान किया !  यात्रियों ने भी उत्साह दिखाया, साथ ही यात्रा कर रहे पुलिस प्रसाशन ,सुरक्षाकर्मियों व जी आर पी के साथियों ने भी भरपूर सहयोग दिया और ठीक 10 बजे यात्रा कर रहे सभी यात्रियों ने एक साथ अपने अपने स्थान पर खड़े होकर तिरंगे को सलाम करते हुए राष्ट्रगान व वंदेमातरम् गाया। ट्रेन के सभी कोच भारत माता की जय, वन्देमातरम् व जय हिंद जय भारत के जयकारों से गुंजायमान हो उठा तत्पश्चात कुछ युवावों ने अन्य देश भक्ति के गीत (सारे जहाँ से अच्छा आदि) भी गाये।
अंत मे कुछ प्रबुद्धजनों ने स्वतंत्रता दिवस के इस अवसर पर अपने विचार भी लोगो के समक्ष रखे एवं मनोनीत जी की सराहना करते हुए ट्रेन उनकी इस पहल के लिए उनको शुभाशीष व धन्यवाद दिया।

रेल यात्रा के दौरान यात्रियों ने मनाया इस अंदाज में स्वतंत्रता दिवस | Gyansagar ( ज्ञानसागर )


आज कुछ लोग इस देश को आजाद नही मानते और उनके अपने तर्क है जो एक हद तक सही भी है पर क्या ये सच नही है कि आज जो आजादी हमे बोलने की,लिखने की,अपने विचार प्रकट करने की मिली हुयी है क्या वो कहीं से भी कम है ???  गुलामी और आजादी एक मानसिकता मात्र ही है ! गुलाम वो है जो भयभीत हुआ है किसी चीज से और आजाद वो है जो निर्भय है और इसीलिए देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तमाम स्वतंत्रता सेनानी ने भय से उप्पर उठकर मृत्यु को भयभीत करके अपना बलिदान दिया !अंग्रेज य कोई भी शासक किसीको तभी गुलाम बना पाते है जब वो भयभीत कर पाने में सक्षम हो ! जब आप भयभीत होना बंद कर देंगे आजादी स्वतः मिल जाएगी !! इस सच्ची घटना को वीडियो में देखने के लिए क्लिक करे - वीडियो देखे 

जिस तरह प्यार और सम्मान किसी तारिक विशेष की मोहताज नही उसी तरह स्वतंत्रता दिवस हो य कोई भी दिवस उसे मनाने के लिए कोई विशेष तिथि-स्थान की मोहताज नही ! मोहताज है तो सिर्फ भावना की !! 



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