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एक शिक्षाप्रद कहानी-सर्कस का हाथी | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

एक शिक्षाप्रद कहानी-सर्कस का हाथीएक बार शहर में सर्कस का खेल चल रहा था जिसमे एक महावत एक हाथी को एक पतली सी डोरी से बाँधकर चारों और घुमा रहा था। यह दृश्य देखकर सभी हेरान थे कि इतना बड़ा हाथी एक पतली सी डोरी से केसे बंधा रह सकता हैं। जबकि यह डोरी तो एक छोटा सा बच्चा भी एक झटके में तोड़ सकता हैं। जब खेल समाप्त हो चूका था और सभी अपने-अपने घर जा रहे थे एक व्यक्ति वहां अभी भी खड़ा उस हाथी को देख रहा था और बार-बार उसी हाथी के बारे में सोच रहा था। जब उसे कोई जवाब नहीं मिला तो उसने उस महावत से पूछा कि आखिर इतना बड़ा हाथी एक छोटी सी डोरी से केसे बंधा रह सकता हैं ! तब महावत नें जवाब दिया। हम जंगल से हाथी का बच्चा लेकर आते हैं। और उसे जंजीरों से बांधकर रखते हैं। हाथी का बच्चा बार बार इन जंजीरों को तोड़ने का प्रयास करता हैं पर वो सफल नहीं हो पाता हैं। हाथी का बच्चा पूरी तरह निराश हो जाता हैं वो यह समझता है कि उसमे इनती शक्ति नहीं हैं की वह इन जंजीरों को तोड़ सके और हाथी का बच्चा पूरी तरह निराश हो जाता हैं। फिर जब हाथी का बच्चा बड़ा हो जाता हैं तो उसे एक ऐसी जगह ले जाया जाता हैं जहाँ बड़े-बड़े हाथी पतली-पतली डोरियों से बंधे होते है और उसे भी एक पतली डोरी से बांध दिया जाता हैं। हाथी यह सोचकर उस डोरी को तोड़ने का प्रयास नहीं करता कि बाकी सभी हाथी भी इसी तरह से बंधे हैं। जब बाकी हाथी इसे नहीं तोड़ सकते तो में कैसे तोड़ सकता हूँ और हाथी सदा उस पतली डोरी से बंधा रहता है जिसे वह कभी भी तोड़ सकता हैं। वह व्यक्ति यह सब सुनकर काफी आश्चर्यचकित हुआ

दोस्तों हमारे साथ भी ऐसा ही होता हैं हम कोई भी काम बस इसीलिए नहीं कर पाते क्योंकि बाकी भी उस काम को कर नहीं पायें। सदा इसी भ्रम में रहते है कि मुझसे यह नहीं होगा। दोस्तों अपने आप को कभी भी कम मत समझिये जो कार्य आपके मित्र आपके रिश्तेदार ने नहीं किया हैं। और बार-बार कोशिश करने के बाद भी आपको सफलता नहीं मिलती तो एक बार फिर पूरे जोश के साथ उस कम को शुरू करियें।

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