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एक शिक्षाप्रद कहानी - सजा बनी सीख | Gyansagar ( ज्ञानसागर )



यह पुराने समय की सनकी राजा की कहानी है । राजा के उसके जुल्म करने की भी कोई सीमा नहीं थी । अगर उसे किसी आदमी पर गुस्सा आ जाता तो उसे बड़ी अमानवीय सज़ा दिया कर था जैसे की किसी को रात भर बर्फ के पानी के अंदर खड़े रहने की सजा ।
एक दिन उसे अपने महामंत्री अरुणेश पर गुस्सा आ गया तो उसने वही तरीका अपनाया और अपने मंत्री को रात भर ठन्डे पानी में खड़े रहने की सज़ा दे दी । अरुणेश बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति था ।वह सोचने लगा कि क्या तरीका हो सकता है कि राजा को सबक मिल सके और खुद वो इस सज़ा से भी बच जाये ।
एक शिक्षाप्रद कहानी - सजा बनी सीखअचानक उसके दिमाग में एक युक्ति आ गयी और जब शाम के वक़्त राजा ने अरुणेश को सज़ा देने के लिए बुलाया तो अरुणेश चेहरे पर मुस्कान लिए राजा के पास पहुंचा तो राजा ने उसे ठन्डे पानी में जाने के लिए इशारा किया लेकिन उसने देखा कि महामंत्री के चेहरे पर बिलकुल भी शिकन या भय नहीं है जबकि वो तो ख़ुशी से झूम रहा है जैसे उसके लिए ये कोई अच्छा अवसर हो ।
हैरान राजा ने उस से पूछ ही लिया कि तुम इतना प्रसन्न किस वजह से जबकि मेने तुम्हे ये सज़ा दी है क्या तुम्हे डर नहीं लग रहा इस पर महामंत्री ने राजा से कहा इसमें डरने वाली कौनसी बात है मेरे लिए तो ये एक तरह से बहुत अच्छा ही है क्योंकि राज वैध्य ने मुझे बताया है कि जल्दी गुस्सा हो जाने वाले व्यक्ति समय से पहले बुढ़ापा पा लेते है और ठन्डे पानी में खड़े रहना इसका सर्वोत्तम उपाय है इसलिए मेरे लिए तो ये फायदेमंद ही होगा क्योंकि मैं भी तो बहुत अधिक गुस्सा करता हूँ ।
राजा को चिंता हुई उसने सोचा बात तो इसकी भी वाजिब है क्योंकि मैं भी तो बहुत गुस्सा करता हूँ इसलिए
उसने महामंत्री को जाने से रोक दिया और कहने लगा तुम नहीं जाओगे मैं आज की रात ये उपचार लूँगा क्योंकि राजा को बुढ़ापे का भय था ।
थोड़ा समय बीता राजा को ठण्ड लगने लगी लेकिन जवानी के लालच में वो खड़ा रहा। लेकिन फिर थोड़ी देर बाद ही उसे ख्याल आया की ठन्डे पानी में खड़े रहकर भला कौन सी जवानी हासिल होती है !! जबकि व्यक्ति इसमें तो बीमार हो सकता है और अधिक देर तक खड़े रहने के बाद उसकी मौत भी हो सकती है। सहसा उसे अपनी भूल का अहसास हो गया कि मैं भी लोगो को ऐसी सज़ा देता हूँ तो उन्हें भी तो कितनी पीड़ा होती होगी। शायद इसी लिए अरुणेश ने मुझे शिक्षा देने के लिए ये कहा होगा !!
राजा को अपनी गलती का अहसास हो गया और उसने महामंत्री को बुलाकर उससे क्षमा मांगी और भविष्य में ऐसे अजब गजब आदेश नहीं देने का वचन भी दिया

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