रिश्तो में मिठास घोले !  आज जहाँ देखो वहां लड़ाई-झगड़े की खबर सुनने को मिल रही है ! अधिकांश का कारण है पैसा ! विपन्नता ! ये विपन्नता का जिम्मेदार कौन है ? अगर इस प्रश्न का उत्तर , गहराई से जानने की कोशिश करेंगे तो हम इसमें स्वयं को दोषी पाएंगे !
आज काफी लोग मेरे परिचित में ऐसे है जो सबसे ज्यादा दुखी है और वो ऐसे लोग है जो पूजा पाठ बहुत करते है ( ध्यान दे - पूजा पाठ उनकी नजर में अगरबत्ती,पाठ करना,व्रत करना आदि से है ) और कुछ समाज सेवी लोग है जिनसे घर वाले ही परेशान है और उनके परिचित ! जब मैंने ऐसे लोगो के दिनचर्या पर गौर फरमाया तो यही देखा कि कुछ तो वाकई में भोले है जो पूजा और समाज सेवा का गलत अर्थ निकाल बैठे है ! जिन्हें उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता है तो कुछ समाज सेवी ऐसे है जो समाज के बारे में ज्यादा सोचते है घर के बारे में कम पर असल में उनका ये गुण जन्मजात ही होता है !, उनका ये व्यवहार उन्हें विरक्ति प्रदान करने लगता है जो सांसारिक बंधनों से मुक्त होने के लिए उन्हें प्रेरित करता है ! ऐसे लोगो को बार बार मरने के लिए भगवान से प्रार्थना करते हुए देखा गया है ! य सब कुछ त्याग देने की भावना भी देखी गयी है ! लगभग एक साल से मेरे परिक्षण में मैंने देखा कि जो भी व्यक्ति अपने कर्तव्यो का समयानुसार सही ढंग से पालन कर रहा होता है वो व्यक्ति हमेशा सम्पन्न होता है और इसी को मै भी प्राथमिकता दूंगा ! कुछ लोग एक काम में पूरी श्रद्धा और विश्वास से अपनी उर्जा नही लगाते परिणाम स्वरूप वो कार्य का फल कम ही मिलता है य नही मिलता है ! तो कुछ लोग जल्दबाजी से कोई कार्य करते है , ज्यादा लाभ य ख़ुशी मिले जिससे पर अधैर्य से किया गया कार्य का फल निराशाजनक ही मिलता है ! आज रिश्तो की मिठास विश्वास और सम्मान से ज्यादा जात-पात,धन,सम्पन्नता,आदि बन गयी है , हालाँकि हर व्यक्ति के रिश्ते की मजबूती इस बात पर बिलकुल निर्भर नही करती ! क्योंकि हर व्यक्ति अलग अलग है लेकिन आज रिश्ते में मजबूती तब आ जाती है जब आप उनके हिसाब से चले य उनकी इच्छा पूर्ति करे , वैसे ही जैसे आधुनिक भक्त भगवान को मनौती मांगने वाला समझ लेते है ! आज रिश्ते में सुख दुःख को बाँटना कम पैसा,टीवी,फेसबुक,व्हाट्स एप्प के मेसेज आ गये है परिणाम स्वरूप रोज घरो में अध्याय की तरह महाभारत घटित होता है ! चिंता को बढ़ाने वाले कारको को अपने आस पास हम अप्रत्यक्ष रूप से पोषित कर रहे है ! आज रिश्तो को ज्यादा तवज्जो सोशल साइट्स पर दी जा रही है और ईश्वर की भक्ति भी जबर्दस्त तरीके से देखी जा सकती है ! कमेंट में जय माता दी य जयश्रीराम लिखने वाले काफी भक्त मिलेंगे लेकिन अपने इलाके में मन्दिर में माता की चुनरी साफ है य नही य पास के मंदिर में राम जी की मूर्ति साफ है य नही ,वस्त्र अच्छे है नही ! इसपर ध्यान नही दिया जाता ! ये बात मै केवल उन सम्पन्न लोगो को कहूँगा जो इस वक्त कर्मशील है और आर्थिक रूप से सम्पन्न है ! खैर ! यहाँ ऐसे लोग भी है जो निस्वार्थ भाव से देशसेवा के उद्देश्य से कार्य कर रहे है , जिन्होंने सिर्फ अपना अहित कराकर दूसरो को दिया ही है और ऐसे लोग भी है जो पार्टी और नेता की भक्ति को राष्ट्रवाद घोषित करने में लगे हुए है ! चाटुकारिता की ऐसी हद हो चुकी है जिसे यही कह सकते है कि थूक के चाटना कोई इनसे सीखे ! यहाँ अधिकांश लोग मुद्दों से हटकर संवेदनशील मुद्दों पर जनता का ध्यान हटाने के लिए एक छद्म रिश्ता बनाने के लिए एक एक भक्त को प्रेरित कर रहे है ! पर जो वास्तिक समस्या है आरक्षण,प्राइवेट स्कूल की लुट,शिक्षा व्यवस्था का व्यापार,ट्यूशन का व्यापार,पानी का व्यापार, प्रकृति का नुकसान इस सब पर इनके मुंह में पेप्सी चली जाती है !! फ़िल्मी -हस्ती अस्पताल में भर्ती हो जाये तो ट्वीट करके संवेदना प्रकट करेंगे पर राष्ट्र भक्ति के लिए ट्वीट करने के लिए इनके पास समय नही है ! इस लेख का प्रयोजन मात्र इतना है कि भक्त बनना है तो खुद का बनिये और खुद को ऐसा बनाइए कि आप अपने आप को सम्मान से देख सके ! भेड़ चाल के शिकार न बनिये न अंधभक्त य पार्टी चाटुकारिता करिये क्योंकि पार्टी में जाने वाला नेता पहले कोई इन्सान ही होता है ! फॉलो विचारो का करिए क्योंकि ऐसा नही है कि इस देश में धरती माँ ने महान आत्माओं का सृजन करना बंद कर दिया है ! हो सकता है आप भी एक महान आत्मा हो और अभी तक खुद को पहचान न पाए हो ! सतयुग और कलयुग सब कुछ मन स्थिति पर निर्भर है मित्रो ! जैसे आपके विचार होंगे वैसा आपका माहौल बन जायेगा ! वैसे ही आप बन जायेंगे वैसा ही समाज बन जायेगा और वैसा ही आपका जीवन हो जय्गेया ! देशभक्ति करने के लिए किसी पाठ्क्रम को सीखने,पढने की जरूरत नही ! अपने दैनिक कर्तव्यो का समयानुसार,सामर्थ्य अनुसार पालन ही देशभक्ति है ! अब आपका रिश्ता कैसा भी हो उसमे अगर प्यार और सम्मान है तो अपनी उर्जा दीजिये नही तो ये आपका समय,उर्जा,वर्तमान,भविष्य सब खराब कर देगा ! रिश्तो में मिठास के लिए गुड़ य शहद नही बल्कि एक दूसरे के लिए सम्मान और विश्वास बहुत जरूरी है ! ये सबसे पहला नियम भी है और यही हर रिश्ते की बुनियाद ये न हो तो कोई भी रिश्ता चाहे क्यों न हो , वो केवल बोझ और मतलब के रिश्ते रह जाते है, बेमतलब रिश्ते !!
इसीलिए भाइयो और बहनों रिश्तो में टीवी,फेसबुक,व्हाट्सएप्प न लाइए कर्तव्य का पालन करिए ,विपन्नता भगाइए , सम्पन्नता लाइए और अपने रिश्तो को सफल बनाइए !

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