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महिलाओं की सुरक्षा का प्रश्न ??

नमस्कार मित्रो

बीतो दिनों से जिस रफ्तार से देश में महिलाओ के खिलाफ अपराध बढ़े रहे है ! वो काफी चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है !! और देश की राजधानी दिल्ली में तो स्थिति और भी भयावह हो चुकी है ! भारत में दिल्ली देश का पहला ऐसा स्थान है जहाँ सबसे ज्यादा अपराध के मामले दर्ज हुए है ! ऐसा नही है कि सिर्फ दिल्ली में ही अपराधिक मामले दर्ज होते है , देश के दूसरे हिस्सों में भी अपराधिक गतिविधियाँ बराबर होती रही है लेकिन सुरक्षात्मक रूप से मजबूत और देश की राजधानी होने के बावजूद यहाँ अपराध के सबसे ज्यादा मामले दर्ज होना अपने आप में एक प्रश चिन्ह है ??

क्या है अपराध के कारण ??

वैसे तो हर कष्ट,दुःख,समस्या और अपराध का मुख्य कारण अज्ञानता है पर अज्ञातना के तत्व को बताना भी जरूरी है और उन तत्वों में कुछ विशेष बिंदु इस प्रकार से है !
१) आज महिलाओ के खिलाफ अपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वाले वे लोग है जो मानसिक रूप से अस्वस्थ्य है य जिनमे व्यवहारिक ज्ञान,संस्कार,संयम नही होते !! ऐसे लोगो को शिक्षा य तो उचित नही मिल पाता य फिर माँ-बाप से उचित संस्कार नही मिला पाता !!
२) तनाव से ग्रसित लोग भी कई मायनों में अपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हुए देखे गये है ! ये तनाव निजी समस्याओ य कई विषयों पर हो सकते है जिसे वर्गीकृत करना बहुत मुश्किल है लेकिन आज के समय में तनाव के जो मुख्य कारणों में से एक है वे है आर्थिक तंगी और इस आर्थिक तंगी को खत्म करने के लिए भी सामान्य नागरिक अपराधिक गतिविधियों को करने के लिए मजबूर हो जाता है !
३) उचित शिक्षा का न होना भी अपराध को जन्म देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ! आज लोगो को  धर्म,उपन्यास,वेद,चरित्र-सयंम,वीर-रस गाथाये इन सब शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है ! आज जो शिक्षा लोगो को दी जा रही है वो पश्चिम सभ्यता की नकल य विदेशी संस्कृति की नकल मात्र है ! भारतीय संस्कृति के अनुसार गुरुकुल,गुरु-शिक्षा पद्धिति के अनुसार ज्ञान का वितरण न होना भी एक कारणों में से एक है !
४) घर-बाहर और वातावरण का बच्चो पर प्रभाव अवश्य पड़ता है ! जिस तरह एक जन्मा बालक वही भाषा बोलता है जो उसके घर पर बोला जाता है उसी प्रकार संस्कार का प्रभाव भी बच्चो पर भली-भांति पड़ता है !! और वो वही सीखता है जो उसके घर य बाहर घटनाये घटित हो !! आज घर पर चरित्रहीन,फूहड़पन,अमर्यादित धारावाहिक को पसंद किया जाता है ऐसे में अपराधिक गतिविधियों को उसे देखने वाले अंजाम न दे ये एक संकुचित प्रश्न ही है !! और घर के बाहर के हालात किसीसे भी छुपे नही है !! घर के बाहर की हालात इससे भी ज्यादा भयावह है !!
५)अपराधिक गतिविधियों को जन्म देने वाले लोगो में नशा करने वाले लोग भी देखे गये है !! ये अपने नशा करने के आदत से मजबूर होते है और नशे में सही गलत की पहचान न होने से ऐसे लोग वो सब कर देते है जो इन्हें ज्ञात नही होता !! ऐसे में ये खुद अपने लिए भी खतरे को जन्म देते है और इनके नजदीक लोगो पर भी खतरा होता है !!
६)टीवी,बॉलीवुड द्वारा चरित्रहीन,अमर्यादित फिल्मो,धारावाहिको जैसे बिग्बौसो,फैशन शो आदि  चीजो से वोे है ! और नतीजा भयावह अपराधिक मामले जैसे बलात्कार और दुष्कर्म की घटनाये प्रायः घटित होती है !! ऐसे में कुछ लोगो द्वारा ये भी आरोप लगाये जाते है कि कम वस्त्रो का पहनना अपराधिक गतिविधियों को आकर्षित य  बढ़ावा देता है ! जबकि ये सिर्फ एक पहलू है और वस्त्रो के आवरण से ही मात्र अपराध हो ये सम्भव नही ! सयंमित,सज्जन पुरुष अपने विवेक से ऐसा नही करते बल्कि वही ऐसा करते है जो ऐसा दूषित विचार लेकर अपना जीवन यापन करते है ! दिन-रात मानसिक रूप से ऐसे विचारो को पोषित करते है और अपनी गलती को ,मात्र कपड़ो के पहनावे पर थोप देते है ! ऐसे लोग आंशिक रूप से दिमागी मरीज व तनावग्रस्त भी होते है !

महिलाओ के प्रति अपराध को रोकन के लिए आम नागरिको के कर्तव्य 


आम नागरिको को चाहिए कि महिलाओ के प्रति वे पवित्र दृष्टिकोण रखे और अपने बच्चो को उचित,संस्कार दे जिससे वे अपराधिक गतिविधियों के प्रति अपना रुख न रखे ! तनाव से बचने के लिए ध्यान व् योग का सहारा ले और अपने बच्चो और आस-पास सगे-सम्बन्धियों को टीवी,बॉलीवुड के दुष्परिनाम से अवगत कराए !! चरित्रहीन धारावाहिक न केवल लोगो के संस्कार खराब करते है बल्कि अस-पास का माहौल भी प्रभावित होता है! नशे के खिलाफ मुहीम चलाई जाये जिससे बच्चे नशे की आदत में न फंस जाये और धर्म-शिक्षा सयंम और व्यवहारिक ज्ञान हम अपने बच्चो को हमेशा देते रहे !!
आम नागरिक को चाहिए कि नारी के प्रति तुच्छ और घटिया दृष्टिकोण वाले फिल्म-धारावाहिकों का विरोध करे जिससे ऐसी चीजे समाज में बच्चो और आम जन में महिलाओ के प्रति अपराधिक गतिविधियों को जन्म न दे !!

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