ज्ञानसागर ब्लॉग में आपका हार्दिक अभिनंदन है !! किसी भी सुझाव,विचार,विमर्श के लिए संपर्क करे 8802939520

Header Ads



एक सच्ची घटना - माल बहुत कम हो गये है न ?? | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

एक सच्ची घटना -  माल बहुत कम हो गये है न ??
साल २०१५ में यही कोई नवम्बर,अक्टूबर का महिना होगा ! परी-चौक ग्रेटर नॉएडा का लोकप्रिय स्थान है वहां जाने के लिए ऑटो का इंतजार कर रहा था होस्टल से ! ताकि छुट्टी में घर जा सकू ! रात काफी थी तो कोई ऑटो वाला दिखा नही लेकिन मै अपना सामान लेकर के पैदल ही चल पड़ा सोचा शारदा से ऑटो मिल जायेगा ! शारदा एक कोलेज का नाम है जो होस्टल से पैदल लगभग १० मिनट के रस्ते पर है ! तभी रस्ते में एक बाइक सवार को देख के लिफ्ट मांगने की इच्छा हुयी ! मै उस बाइक सवार व्यक्ति को पीछे देख के मुड़ा और वो भी शायद मेरा हाव-भाव समझ गया होगा तभी उसने मेरे बगल बाइक रोक कर पूछा - कहाँ जाना है ? मैंने कहा परी-चौक ! उसने भी कहा मै भी वहां जा रहा हूँ आ जाओ छोड़ देता हूँ ! मै अपना बैग लेकर के बैठ गया ! उनका धन्यवाद किया और परी-चौक पहुंचने से मात्र कुछ दूरी पहले उन्होंने कुछ बात की वो उस समय मेरे लिए आश्चर्य कर देने वाली थी ! उन्होंने कहा - यहाँ माल बहुत कम हो गये है न भाई ? मैंने कहा कौन सा माल ? उन्होंने कहा -यही कॉलेज की लड़कियाँ !! मै पहले तो कुछ देर चुप रहा फिर हँसा, फिर रहा नही गया बोलना ही पड़ा ! चुप रहने का कारण था कि मै उनसे मदद ली हुयी थी ऐसे में चलते बाइक पर कड़वी गोली देना मुझे असमंजस की स्थिति में डालना खुद को लगा ! मैंने आखिरकार बोल ही दिया ! मन में कब तक दबा कर रखता ! उनसे पूछा भाई जी आपकी बच्ची है कोई ? उन्होंने कहा - हाँ है ! मैंने कहा- कहाँ के रहने वाले हो तो कहा तुगलपुर ! फिर मैंने कहा - उसको कॉलेज में तो पढ़ाओगे न ? बोला बिलकुल भाई ! मैंने कहा - जब आप अपनी बच्ची को कालेज में पढ़ाने का अभी से सोच रहे हो तो आप दूसरे बच्ची की लड़की को कैसे माल बोल सकते हो ? कल को आप की तरह ही कोई शक्स ये विचार आपके लड़की के लिए ही रखेगा तो कैसा लगेगा आपको ? उसे कोई माल बोलोगा तो आप सहन कर पाओगे ? आपकी बेटी की तरह ही यहाँ हर लड़की किसीकी बहन,बेटी है ये बात हर लड़की पर लागू होती है फिर आप अपनी बच्ची को माल सुनना,बोलना पसंद नही कर सकते तो दूसरो के लिए ऐसी भावना क्यों ?

मैंने ये सब बोल तो दिया था पर बोलने के बाद पसीने भी आ गये ! डर लग रहा था कि बाइक से उतारकर मारना शुरू न कर दे ! य बीच में न उतार दे ! खैर बीच में उतारता तो चला ही जाता क्योंकि वाल्किंग डिस्टेंस पर परी चौक था ! उस बाइक सवार ने मुझसे पूछा - भाई यहाँ कहाँ रहते हो तो मैंने कहा यही rsd होस्टल में ! फिर कहा कहाँ के रहने वाले हो तो बताया नॉएडा के ! तो उसने हैं ?? करके कुछ कहा ! परी चौक आ गया और मैंने उनकी मदद का धन्यवाद किया और फिर बाद में उन्होंने कहा भाई तुम्हारी बात बहुत सही लगी अब से ध्यान रखूंगा ! मैंने कहा भाई सब अपने ही है बस अपने खून के रिश्तो में ही प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है ! दूसरी की बहन की इज्जत करेंगे तो हमारी बहन की भी इज्जत होगी ! जैसा नजरिया हम दूसरो के लिए रखेंगे वैसा ही लोग हमारे लिए रखेंगे इसीलिए अब ये माल शब्द कभी मत कहना ! और मैंने बस पकड़ी चल पड़ा ! ये किस्सा याद आने का कारण मित्रमंडली में किसीने ऐसे ही किस्से से सम्बन्धित बात का जिक्र किया था !

सारांश सागर

 Posted By Saransh Sagar

अनुभव को सारांश में बताकर स्वयं प्रेरित होकर सबको प्रेरित करना चाहता हूँ !             


No comments

Powered by Blogger.