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एक धार्मिक स्थल - शिव पार्वती मंदिर सोहागपुर, होशंगाबाद, मध्यप्रदेश | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

 मंदिर का इतिहास ( किंवदंती ) - 1

शिव पार्वती मंदिर का इतिहास कई हजार साल पुराना है और इस मंदिर में स्थापित मूर्ति लगभग 5000 साल पुरानी है। माना जाता है कि ये मूर्ति कुएं की खुदाई में मिली थी।
 पुराणों में उल्लेख के अनुसार सोहागपुर का प्राचीन नाम श्रोणितपुर(रक्तनगरी) था जो बाणासुर की नगरी थी।
ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण जी ने सोहागपुर आकर बाणासुर को मारा था। इस नगर में आज भी घर बनाने, कुए खोदने, सेफ्टिक टेंक बनाने के लिए खुदाई में कोई न कोई प्राचीन कलाकृति मिलती लोगो को अवश्य मिलती है।
कहते है कि कुछ लोंगो को अपार धन से भरे घड़े भी मिले हैं किन्तु मिलने वाले कि या तो मृत्यु हो गई या वो पागल हो गया।। अब ये कितना सच है ये तो प्रयत्क्षदर्शी व् अनुभव करने वाले लोगो पर आधारित है !
जिन्होंने उस धन का का कुछ प्रतिशत ( अंश ) दान धर्म सेवा में खर्च किया वो तो सुखी हैं।  एक महाराज जिन्हें मुद्गल जी महाराज के नाम से भी जानते हैं। उन्हें भी अपार धन संपदा मिली थी आज वो यज्ञ गौशाला समाजसेवा आदि में बहुत खर्च करते हैं। इसलिए आज वो सुखी और संतुष्ट हैं !

शिव पार्वती मंदिर सोहागपुर, होशंगाबाद, मध्यप्रदेश


शिव पार्वती मंदिर सोहागपुर, होशंगाबाद, मध्यप्रदेश






शिव पार्वती मंदिर सोहागपुर, होशंगाबाद, मध्यप्रदेश


शिव पार्वती मंदिर सोहागपुर, होशंगाबाद, मध्यप्रदेश


शिव पार्वती मंदिर सोहागपुर, होशंगाबाद, मध्यप्रदेश


शिव पार्वती मंदिर सोहागपुर, होशंगाबाद, मध्यप्रदेश


शिव पार्वती मंदिर सोहागपुर, होशंगाबाद, मध्यप्रदेश


शिव पार्वती मंदिर सोहागपुर, होशंगाबाद, मध्यप्रदेश


 मंदिर का इतिहास ( किंवदंती ) - 2

माना जाता है कि जिस जमीन पर मंदिर स्थापित है वहां और उसके आस-पास के क्षेत्र में भुत-पिशाच और प्रेत-आत्माओं का राज चलता था ! अपने शक्तियों से वहां के निवासियों को परेशान करना रोज की घटना हुआ करती थी ! कहा जाता है इसी समस्या के समाधान हेतु शिव जी ने एक खेत के मालिक को स्वप्न में दर्शन दिये !! दर्शन में शिव जी ने बताया कि मेरी प्रतिमा ( मूर्ति ) तुम्हारे खेत में दबी हुयी है ! उसके बाद उस खेत के मालिक ने अपने खेत में खुदाई करवाई तो पाया कि वाकई में शिव-पावर्ती की मूर्ति दबी हुयी है ! ये देख तत्काल उस खेत के मालिक ने अपनी जमीन को मंदिर बनाने के लिए दान कर दिया और तब से ये क्षेत्र भूत-पिशाच और प्रेत-आत्माओं के आतंक से मुक्त हुआ और यहाँ का माहौल फिर सात्विक होने लगा ! आज नित्य रूप से यहाँ भक्तजन इस मंदिर पे दर्शन करने आते है !! और शिव रात्रि पर इस पावन स्थान पर विराट मेला लगता है जिसमे दूर दूर से भक्तजन शिव-पार्वती की पूजा करने आते है !! 

ॐ नमः शिवाय 
हर हर महदेव 

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