ज्ञानसागर ब्लॉग में आपका हार्दिक अभिनंदन है !! किसी भी सुझाव,विचार,विमर्श के लिए संपर्क करे 8802939520 ! अपने व्यापार य सर्विस की वेबसाइट बनवाने हेतु संपर्क करे !

Header Ads



Shree Bamleshwari Chalisa In Hindi | श्री बमलेश्वरी चालीसा | चालीसा संग्रह | Gyansagar ( ज्ञानसागर )


Shree Bamleshwari Chalisa In Hindi


  जय जय जय विमले महारानी , तेरी माया जग नहीं जानी । 
मस्तक रजत मुकुट हैं राजे , बाँये अखण्ड ज्योति बिराजे । । 
मंगल , शनि होत अभिषेका , आरति , पूजन भांति अनेका । 
केहरि साक्षात् रखवाला , अति मंजुल रमणीक शिवाला । 
उच्चभंग तव आसन राजे , पंचवटी सम चहुं दिश साजे ।
 चैत , क्वार में जलती ज्योति , पूरण आश भक्त की होती ।
 श्रद्धा से जो ज्योति जलाता , नशे पाप वांछित फल पाता ।
 दर्शन जो कर गये तुम्हारे , हुए मुदित पाये सुख सारे ।
 कह ली तेरी कीर्ति बखानी , तू है रिद्ध सिद्ध जग जानी । ।
 दृग से प्रेम विन्दु टपकाती , लाज भक्त की सदा बचाती । 
न पूजा न अर्चन आता , निश दिन नाम तुम्हारे गाता ।

 बस एक ध्यान तुम्हारे चरणा , होउं प्रसीद अनन्ता करुणा  । 
जो जन राठ करे इक बारा , शत अष्ट जपे इक बारा । । 
तू ही शारदा , चण्डी , काली , दुर्गा , अम्बे , जग रखवाली । 
शिवा , तुमी , पुण्या , विमला , गौरी दृक् प्रकाशिनी कमला । । 
भूतेशा सर्व तीर्थमयी हो , वर्ण रूपिणी शास्त्रमयी हो । 
जन पूजिता व शुभा भारती , गुणमध्या तव करत आरती । 
अशुभवा हो भूत धारणी , सूक्ष्मा कल्पा व नारायणी । 
कृष्या पिंगला निरालसा हो , जन प्रिया सर्व ज्ञान प्रदा हो । 
नित्या नंदा कमला रानी , सूक्ष्मा सर्व गता महारानी । 
सदा जया गुणश्रया शान्ता , कामाक्षी निर्गुणा कान्ता । 
दम्या सुजया वरूपिणी , शास्त्रा दृश्या विंध्यवासिनी ।
 तुम्ही जान्हवी देवा माता , पार्वती हो जगविख्याता । 
भूतेशा मात्रा शुभ्रा हो , इन्द्रा जेष्ठा व रौद्रा हो ।

 तुम्ही चण्डिका जया दुरन्ता , दया दात्री तुम्ही दिगन्ता । ।
दुराशया दुर्जया कराली , तुम्ही कामिनी लोक निराली । । 
दर युक्ता दर हरा वनीशा , दृष्टि गोचरा तुम्ही मनीशा ।
 सर्व अभीष्ट प्रदायनी अम्बे , दशदिक्ख्याता हो जगदम्बे । 
तुम्ही हो माता श्रुति पूजिता , दीन वत्सला देव वन्दिता ।
 दयाश्रया कर्मज्ञान प्रदा हो , दुष्कृति हरता तुम्ही सदा हो ।
 सरस्वती हो दुष्ट दाहिनी , जनप्रिया हो रोग नाशिनी ।
 असुरहरा हो तुम्ही दिगम्बा , तू ही मोह माया हो जगदम्बा । 
देवरता हो देवमान्या , अम्बुज वासिनी देवधान्या ।
 भूतात्मिका तुम्ही रूद्रानी , उमा माधवी हो ब्रम्हानी । 
गहूं मैं शरण परम गति पाऊँ , करहुं कृतार्थ जनम गुण गाऊँ ।
 नित उठ पाठ करै नर जोई , ताकर पूर्ण मनोरथ होई । । 
हर विपदा में होत सहाई , अधम जानि नहि देव भुलाई ।
 नौव दिवस तक करे उपासा , मन में रखें धैर्य विश्वासा ।
 नवरात्रि में ज्योति जलाये , श्रद्धा से जो पाठ कराये । । 
मुदित होयगी निश्चित माता , हरण करेगी तीनों तापा । 

। । दोहा । ।  

दम्या दुर्लभ रूपिणी , ज्ञान रूपा तपस्विनी । । 
निराकारा योगगम्या , नमोऽस्तुते विलासिनी ।


सारांश सागर

सारांश सागर द्वारा प्रकाशित किया गया

अनुभव को सारांश में बताकर स्वयं प्रेरित होकर सबको प्रेरित करना चाहता हूँ !             


No comments

Powered by Blogger.