ज्ञानसागर परिवार में आपका हार्दिक अभिनंदन है !! किसी भी सुझाव,विचार,विमर्श के लिए संपर्क करे 8802939520


Shree Laxmi Chalisa In Hindi | श्री लक्ष्मी चालीसा | चालीसा संग्रह | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

Shree Laxmi Chalisa In Hindi | श्री लक्ष्मी चालीसा | चालीसा संग्रह | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

 । । दोहा । ।

 मातु लक्ष्मी करि कृपा , करो हृदय में वास । 
मनोकामना सिद्ध करि , पुरवहु मेरी आस । । 

।। सोरठा ।। 

  यही मोर अरदास , हाथ जोड़ विनती करूँ । 
सब विधि करौ सुवास , जय जननि जगदंबिका । । 

 ॥ चौपाई ॥ 

सिन्धु सुता मैं सुमिरों तोही , ज्ञान बुद्धि विद्या दे मोही । 
तुम समान नहीं कोई उपकारी , सब विधि पुरवहु आस हमारी । । 
जय जय जय जननी जगदम्बा , सबकी तुम ही हो अवलम्बा । । 
तुम हो सब घट घट की वासी , विनती यही हमारी खासी ।

जग जननी जय सिन्धुकुमारी , दीनन की तुम हो हितकारी ।
 बिनवों नित्य तुमहिं महारानी , कृपा करो जग जननि भवानी । 
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी , सुधि लीजै अपराध बिसारी । ।
 कृपा दृष्टि चितवो मम ओरी , जग जननी विनती सुन मोरी ।
 ज्ञान बुद्धि सब सुख का दाता , संकट हरो हमारी माता । 
क्षीर सिन्धु जब विष्णु मथायो , चौदह रत्न सिन्धु में पायो ।
चौदह रत्न में तुम सुखरासी , सेवा कियो प्रभु बन दासी । 
जो जो जन्म प्रभु जहां लीना , रूप बदल तहँ सेवा कीन्हा । 
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा , लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा । । 
तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं , सेवा कियो हृदय पुलकाहीं । 
अपनायो तोहि अन्तर्यामी , विश्व विदित त्रिभुवन के स्वामी ।
 तुम सम प्रबल शक्ति नहिं आनि , कहँ लौं महिमा कहाँ बखानी । 
मन क्रम वचन करै सेवकाई , मन इच्छित वांछित फल पाई ।

तजि छल कपट और चतुराई , पूजहिं विविध भाँति मन लाई । 
और हाल मैं कहाँ बुझाई , जो यह पाठ कर मन लाई । 
ताको कोई कष्ट न होई , मन इच्छित पावै फल सोई । 
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणी , ताप पाप भवबंधन हारिणी ।
 जो यह पढ़े और पढ़ावे , ध्यान लगाकर सुनै सुनावै । । 
ताको कोई न रोग सतावे , पुत्र आदि धन सम्पति पावै । ।
पुत्रहीन अरु संपतिहीना , अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना । 
विप्र बोलाय के पाठ करावै , शंका दिल में कभी न लावै । 
पाठ करावै दिन चालीसा , तापर कृपा करें गौरीसा । 
सुख सम्पति बहुत सो पावै , कमी नहीं काहु की आवै ।
 बारह मास करे सो पूजा , तेहि सम धन्य और नहिं दूजा ।
 प्रतिदिन पाठ करै मनमाही , उन सम कोई जग में कहुं नाहीं । ।
 बह विधि क्या मैं करौं बड़ाई , लेय परीक्षा ध्यान लगाई ।

करि विश्वास कर व्रत नेमा , होय सिद्ध उपजे उर प्रेमा ।
 जय जय जय लक्ष्मी भवानी , सब में व्यापित हो गुणखानी । 
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं , तुम सम कोउ दयालु कहुँ नाहिं । । 
माहि अनाथ की सुध अब लीज , संकट काटि भक्ति मोहि दीजै । । 
भूल चूक करि क्षमा हमारी , दर्शन दीजै दशा निहारी । ।
 केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई , ज्ञान बुद्धि मोहि नहिं अधिकाई ।
 बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी , तुमहि अछत दु : ख सहते भारी ।
 नहिं मोहि ज्ञान बुद्धि है मन में , सब जानते हो अपने मन में ।
 रूप चतुर्भुज करके धारण , कष्ट मोर अब करहु निवारण । 

। ।  दोहा । । 

त्राहि त्राहि दु : ख हारिणी , हरो बेगि सब त्रास । । 
जयति जयति जय लक्ष्मी , करो दुश्मन का नाश । ।
 रामदास धरि ध्यान नित , विनय करत कर जोर ।
 मातु लक्ष्मी दास पै , करहु दया की कोर । । 


ऐसे ही अन्य लेख जैसे चालीसा,शिक्षाप्रद कहानी,कविता और भक्ति व् ज्ञान के अद्भुत संगम के संग्रह को अपने Gmail अकाउंट में प्राप्त करने के लिए अभी Signup करे और पाये हमारे ताजा लेख सबसे पहले !! ध्यान रहे ! अपने ईमेल अकाउंट में वेरिफिकेशन प्रोसेस जरुर कम्पलीट कर ले , लेख पसंद आये तो शेयर व् कमेंट जरुर करे और whatsapp पर हमारे लेख प्राप्त करने के लिए नीचे क्लिक करे 


email updates



No comments

Powered by Blogger.