ज्ञानसागर परिवार में आपका हार्दिक अभिनंदन है !! किसी भी सुझाव,विचार,विमर्श के लिए संपर्क करे 8802939520


Shree Tulsi Chalisa In Hindi | श्री तुलसी चालीसा | चालीसा संग्रह | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

Shree Tulsi Chalisa In Hindi | श्री तुलसी चालीसा | चालीसा संग्रह | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

 ॥  दोहा ॥

 श्री तुलसी महारानी , कसँ विनय सिरनाय । । 
जो मम हो संकट विकट , दीजै मात नशाय 

॥ चौपाई ॥ 

नमो नमो तुलसी महारानी , महिमा अमित न जाय बखानी ।
 दियो विष्णु तुमको सनमाना , जग में छायो सुयश महाना । 
विष्णुप्रिया जय जयति भवानि , तिहूं लोक की हो सुखखानी । 
भगवत पूजा करे जो कोई , बिना तुम्हारे सफल न होई ।
 जिन घर तव नहिं होय निवासा , उस घर करहिं विष्णु नहिं बासा ।

 करे सदा जो तव नित सुमिरन , तेहिके काज होय सब पूरन ।
 कातिक मास महात्म तुम्हारा , ताको जानत सब संसारा । 
तव पूजन जो करें कुंवारी , पावै सुन्दर वर सुकुमारी ।
 कर जो पूजा नितप्रति नारी , सुख सम्पत्ति से होय सुखारी । । 
वृद्धा नारी करै जो पूजन , मिले भक्ति होवै पुलकित मन । । 
श्रद्धा से पूजे जो कोई , भवनिधि से तर जावै सोई ।
 कथा भागवत यज्ञ करावै , तुम बिन नहीं सफलता पावै । 
छायो तब प्रताप जगभारी , ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी । 
तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन में , सकल काज सिधि होवै क्षण में ।
 औषधि रूप आप हो माता , सब जग में तव यश विख्याता । 
देव रिषी मुनि औ ' तपधारी , करत सदा तव जय जयकारी ।
 वेद पुरानन तव यश गाया , महिमा अगम पार नहिं पाया ।

 नमो नमो जै जै सुखकारनि , नमो नमो जै दुःखनिवारनि । । 
नमो नमो सुखसम्पति देनी , नमो नमो अघ काटन छेनी । । 
नमो नमो भक्तन दुःख हरनी , नमो नमो दुष्टन मंद छेनी ।
 नमो नमो भव पार उतारनि , नमो नमो परलोक सुधारनि ।
 नमो नमो निज भक्त उबारनि , नमो नमो जनकाज संवारनि ।
 नमो - नमो जय कुमति नशावनि , नमो नमो सब सुख उपजावनि । 
जयति जयति जय तुलसीमाई , ध्याऊँ तुमको शीश नवाई । 
निजजन जानि मोहि अपनाओ , बिगड़े कारज आप बनाओ ।
 करूँ विनय मैं मात तुम्हारी , पूरण आशा करहु हमारी ।
 शरण चरण कर जोरि मनाऊँ , निशदिन तेरे ही गुण गाऊँ ।
 करहु मात यह अब मोपर दाया , निर्मल होय सकल ममकाया ।
 मांगू मात यह बर दीजै , सकल मनोरथ पूर्ण कीजै ।

जानू नहिं कुछ नेम अचारा , छमहु मात अपराध हमारा । । 
बारह मास करै जो पूजा , ता , सम जग में और न दूजा । 
प्रथमहि गंगाजल मंगवावे , फिर सुन्दर स्नान करावे । 
चन्दन अक्षत पुष्प चढ़ावे , धूप दीप नैवेद्य लगावे । 
करे आचमन गंगा जल से , ध्यान करे हृदय निर्मल से ।
 पाठ करे फिर चालीसा की , अस्तुति करे मात तुलसा की । 
यह विधि पूजा करे हमेशा , ताके तन नहिं रहै क्लेशा । 
करै मास कार्तिक का साधन , सो वे नित पवित्र सिध हुई जाहीं ।
 है यह कथा महा सुखदाई , पढ़े सुने सो भव तर जाई । |

। ।  दोहा । । 

यह श्री तुलसी चालीसा , पाठ करे जो कोय । 
गोविन्द सो फल पावही , जो मन इच्छा होय ॥

______________________________________________




ऐसे ही अन्य लेख जैसे चालीसा,शिक्षाप्रद कहानी,कविता और भक्ति व् ज्ञान के अद्भुत संगम के संग्रह को अपने Gmail अकाउंट में प्राप्त करने के लिए अभी Signup करे और पाये हमारे ताजा लेख सबसे पहले !! ध्यान रहे ! अपने ईमेल अकाउंट में वेरिफिकेशन प्रोसेस जरुर कम्पलीट कर ले , लेख पसंद आये तो शेयर व् कमेंट जरुर करे और whatsapp पर हमारे लेख प्राप्त करने के लिए नीचे क्लिक करे 


email updates



No comments

Powered by Blogger.