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एक प्रेरणादायक कविता - आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

एक प्रेरणादायक कविता - आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत

आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत

नदी-नालों में अविरल जल की फिर से धार बहे सुरमय,
गली-बगीचे मुग्ध दिखें और पुष्प खिलें सुंदर तनमय,
हर नारी विदुषी हो और कर्मठ हो हर घर बालक,
आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत... 
आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत... 


हो आचरण हमारे ऐसे विश्व को कुछ सिखला जाऊं,
निज माँ भी कोख पर गर्व करें और सबका प्यारा बन जाऊं ,
मातृभूमि की रक्षा हित में हो निपुण सदा मेरी आदत !!
आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत... 
आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत... 

हम आपस का भेद मिटाकर सबको हृदय से लिपटाए,
छत्तीस कौम के भाईचारे का परचम हम सब लहराएं,
जाति-धर्म का भेद नहीं हमें प्रेम-प्रीत की है चाहत,
आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत... 
आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत... 
..
लोकतंत्र के भ्रष्ट तंत्र का हमपे षड्यंत्र कराते है,
हमारा हक मार कर वे उसे अपना अधिकार बतलाते  है,
सत्त्ता के इन चोरों पर हम आओ चोट करें कठोर घातक !!
आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत... 
आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत... 

हत्या-लूट और बलत्कार से व्यथित हो गया है मेरा मन,
बच्ची भ्रूण में मार दी जाती , देख रहे पूरे जन-गण !
पुनः प्रकट हो प्रभु राम , माधव करो तुम महाभारत  !!
आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत... 
आओ स्वच्छ करें निर्मल भारत... 

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सारांश सागर

प्रशांत सिंह चौहान द्वारा लिखा गया

भावों के शब्दों को पिरोकर मैं माला बनाता हूँ जिसे आप कविता कहते है और उसी से प्रेरित होकर सबको प्रेरित करना चाहता हूँ !             



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