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आनंद विहार ( दिल्ली ) से गया और गया से भागलपुर दो लात मारके ट्रेन का रोमांचकारी सफर !! | Gyansagar ( ज्ञानसागर )


 आनंद विहार ( दिल्ली ) से गया और गया से भागलपुर दो लात मारके ट्रेन का रोमांचकारी सफर !!


जन्म लेने के पश्चात से ही एक आम व्यक्ति से अधिक यात्रा शायद जीवन रेखा में अंकित है तभी तो अनायास ही न चाहते हुये अनचाहे यात्राओं में अपनी उपस्थिति को पाता हूँ !! और इसी कारण खुद को सबसे अलग मै जान पाता हूँ !! ये समय का चक्र कहें य नियति की मांग ! शिक्षा का प्रभाव य जनता का जागरूक होना पर वाकई में वर्तमान सरकार के नेतृत्व में काफी चीजों में बदलाव आया है और काफी चीजो में प्रगति देखने को मिला !! एक देशभक्त होने के नाते किसी भी पार्टी की चाटुकारिता करना किसी के लिए भी शोभनीय नही है पर देश में वर्तमान समय में क्या हो रहा है और कितना हुआ है वो उस व्यक्ति विशेष की जिम्मेदारी हो जाती है ! एक सोशल मीडिया में अपनी निजी जीवन,समस्या से अवगत कराते कराते कब पाठक लोगो के प्यार से कवि व् लेखक का सम्मान मिला ये शनै शनै समझ में आने लगा है !! खैर मुद्दे की बात करते है !! ट्रेन में साफ सफाई जबर्दस्त !! अब जैसा आपके साथ पहले शेयर किया था साल 2016 में कि ट्रेन में वाशरूम में फोन नंबरो की लिस्ट व् गाली-गलौज भरे होते थे पर ऐसा अब बिलकुल न था !! भीड़ भाड़ प्लेटफार्म में बहुत कम शायद मौसम के कारण य नियंत्रण शक्ति का जादू हो !!! लेकिन दिल दिमाग दोनों खुश थे क्योंकि स्लीपर बोगी में जबरदस्ती कब्जा करने वाले लोग नही थे नही तो वो चीज काफी कष्टकारी बना देती है सफर को !! शाम 7:10PM पर ट्रेन खुली और सारे काम धंधे को एक तरफ करते हुए गाना सुनते हुए मै सुबह करीब साढ़े दस बजे गया पहुँच गया !! वैसे हर तरफ इतना सुलभ यात्रा संभव नही होता है !! शादी में सम्मिलित होने के पश्चात नानी के नानी घर से भागलपुर जो कि मेरा जन्मस्थान है और दादी-नानी घर भी वहां जाने के लिए दोपहर की ट्रेन पकड़ी !! छात्रों के परीक्षा होने के कारण हमे समझौता करना पड़ा य यूँ कहे जबरदस्ती कष्ट करके भागलपुर पहुंचना पड़ा ! मामी,मौसी,मम्मी और बच्चो के साथ काफी चिंता हो जाती है क्योंकि स्लीपर बोगी में बिना टिकेट के अशिष्ट बात करते हुए और आक्रमणकारी स्वाभाव के साथ वो जिस तरह व्यवहार करते है वो एक दहशत का माहौल बना देता है !! खैर इस अनुभव से एक बात के लिए आपको अवश्य आगाह करूँगा ! सफर के दौरान मै अक्सर सोता नही क्योंकि सुरक्षा मेरी प्राथमिक होती है और ऐसा ही मैंने हर यात्रा में अब तक किया है !! ट्रेन में आप अपने रिजर्वेशन टिकेट को घर तक नही ले जाने वाले न ही मरने के बाद इसीलिए लड़ाई से बेहतर है समझौता कर ले लेकिन जब अति हो जाये तो सुरक्षा व् बचाव के लिए आप आक्रमक अवश्य बनिये !! गया से भागलपुर जाने के वक्त मैंने दो लात मारी एक युवक को !! १० वीं  की परीक्षा देने के बाद सीट पर बन्दर की तरह उछलते कूदते चढ़ रहा था !! और नीचे मामा लेटे हुए थे क्योंकि उनका पेट खराब था और चप्पल की धुल उनके उप्पर झड़ गयी ! लेटने के कारण उनको पता नही चला न मैंने देखा पर हल्ला करने के कारण मैंने आक्रमक रूप लिया क्योंकि सब चुप थे !! ध्यान दे काफी लोगो की सीट रिज़र्व थी लेकिन बोलने वाले काफी कम होते है !! काफी बहादुर लोग देखने का काम कर रहे थे और मै सुधारने का !! मै कोई अपनी तारीफ सुनाने के लिए नहीं बता रहा पर अपने अधिकारों के लिए लड़ना कोई बुराई नही है न ही शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए लड़ना कोई बुराई है !! जब एक असंतुलन दिखा तब मैंने ऐसा रूप लिया इस रूप से मेरे रिश्तेदार अवगत नही थे !! आँखे लाल,ललाट लाल और आवाज जो मधुर थी वो एकदम से कर्कश और इस होश में मुझे भी होश नही रहता कि ये कर क्या रहा हूँ !! लात मारने के बाद सब मुझे बताने और समझाने लगे कि वो लोग कुछ करते तो क्या करता !! मेरा बस एक ही जवाब था अगर मै गलत नही हूँ तो मुझे फर्क नही पड़ता मेरे सामने और पीछे कौन है !! मै सही हूँ और सच्चे लोग हमेशा जीतते है और यही उसूल से जीवन में छोटे मोटे कारनामो से विजयी होता आया हूँ !! हमने सीट शेयर जरुर की क्योंकि हम ट्रेन की व्यवस्था को अच्छे से समझते है और लात मारने के बाद उसको प्यार से समझाया बाद में उसने खुद माफ़ी मांगी और बोला अब नहीं करेंगे भैया !! एक्साम अच्छा गया था इसीलिए चिल्लाने लगे मैंने कहा चिल्लाना और ख़ुशी मनाना स्वाभाविक है लेकिन वक्त और हालात देखना चाहिए कि कब क्या आप किसके साथ कैसा व्यवहार कर रहे है !!


खैर आपको बता दूँ लात मैंने अकेले मारी थी किसी के स्वजन के सामने नही क्योंकि भीड़ में सब अलग सीट पर थी,लात अप्पर क्लास से अप्पर क्लास तक लगी थी !! करीब साढ़े सात बजे हम भागलपुर पहुंचे जहाँ हम बच्चो और बड़े परिवार के कारण अनियंत्रित भीड़ ने लिहाज के कारण अपने आप को ट्रेन में नही घुसना उचित समझा और जैसे ही हम उतरे , एक टूटे डैम से पानी के लहर के जैसे लोग ट्रेन में घुसना शुरू हुए !! आपको बता दूँ ट्रेन का ये सफर बिहार में ज्यादा कष्टकारी रहता है बाकि जगह ये सफर काफी आनंददायक रहता है लेकिन क्योंकि बिहार संख्या के मामले में प्रसिद्ध है इसी कारण ये समस्या यहाँ आने वाले हर सक्श को झेलना ही पड़ता है !!
पढ़ने के लिए धन्यवाद !!

सारांश सागर

सारांश सागर द्वारा प्रकाशित किया गया

अनुभव को सारांश में बताकर स्वयं प्रेरित होकर सबको प्रेरित करना चाहता हूँ !             


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