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Ravish Kumar Positve Thoughts In Hindi | रविश कुमार के सुविचार | Gyansagar ( ज्ञानसागर )


Ravish Kumar Positve Thoughts | रविश कुमार के सुविचार | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

1. मैं जब बिहार से आया था तो तब सोचता था कि पलायन का मतलब भागना होता है। धीरे-धीरे पता चला कि पलायन का मतलब होता है ,संभावनाओं की तलाश।

2. क्या करना है कभी यह सोचकर दफ्तर नहीं आया? फितरत कुछ करते रहने की थी... कुछ नया लिखना, कुछ नई कहानी मिलनी चाहिए, कुछ नई तस्वीर होनी चाहिए।

3. NDTV के 25 से अधिक वर्षो के अनुभव में 16 साल मेरी जिंदगी के है।

4. जब आप अकेले होते हैं, तभी आपकी असली ताकत का इन्तेहान होता है।

5. यह सही बात है कि मैं TV नहीं देखता हूं ।अपवाद के लिए 1% या 2% देखता हूं।


6. पूरा जीवन लगाकर मैं यही कहता रहा कि सरकार चुनने की बाद मतदाता बनजाइए। किसी चिरकुट का फैन मत बनिए ।ना पत्रकार का ना नेता का। आप किसी नेता का फैन बन कर खुद का विलय सरकार और उसकी विचारधारा में कर लेंगे, तो आप जनता नहीं रह जाएंगे।

7. मुझे लगता है कि अगर आपको बातों से, घटनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता तो आपको कम से कम पत्रकार तो नहीं होना चाहिए।

8. Objectivity एक बेहतर समाज बनाने के लिए सही है।

9. लेकिन एक ही दफ्तर में 16 साल वो भी तब जब हमारे साथ के, इस पेशे के कई लोग रोज या साल या दो साल, महीने, डेढ़ महीने में अचानक बदल दिया करते थे। मैंने नहीं बदला...... लेकिन कई बदलने वाले कहा करते थे कि तुम तालाब हो गए हो और तालाब का पानी बहुत दूर तक बहकर नही जाता। तब मैं सोचा करता था... और आज मुझे उसका जवाब कई बार मिलता है कि  दरअसल उन्होंने कभी तालाब को ठीक से नहीं देखा, तालाब होता ही है इसलिए जब कभी भी आपको छाँव की तलाश हो, पानी की तलब हो तो आप उसके पास जाए। ये तलाब बहुत काम का होता है।

10. किसी ने पूछा ही नहीं कि... आज तुम्हारा कौन सा एपिसोड है? तुम क्या कर रहे हो? इतनी आजादी, आप यकीन नहीं करेंगे.. लेकिन रवीश रिपोर्ट में अगले हफ्ते मैं क्या करूंगा यह सिर्फ मुझे मालूम होता था और कहानी कौन सी होगी ये मै भी ठीक से नहीं जानता था।

11. अगर आप पत्रकार में भी नेता की छाया देखेंगे तो सत्यानाश करेंगे इस लोकतंत्र का.... मैं बता रहा हूं इसका हिसाब किताब... मैं इसे एक लाइन बता रहा हूं कि नेता को आपने वोट दिया तो अपने मोहब्बत की कीमत आप direct वसूलो। अगर एजेंट हमको बना दोगे.. हम तो इतना वसूल लेंगे की आपको चवन्नी भी नहीं मिलेगी।

12. यह मै बता दूँ  कि पत्रकारिता का कोई भी स्वर्णकाल नही था।


13. आज newsroom में पार्टीयो को लेकर reporters मे झगड़ा होने लगा है। बाहर जाकर reporters एक दूसरे से बात नही करते हैं। वो कहता है वो उसका supporter है..वो उसका supporter है तो उससे बात मत करो। ये बहुत दुखद स्थिति है।

14. पहले शहीद तो कहो, फिर शहीद के नाम पर झगड़ना।

15. मैं युद्ध का विरोधी हूं। युद्ध सिर्फ एक धंधा है हथियारों को खपाने और बेचने का धंधा।

16. आम लोगो से लेकर इंजीनियर, डॉक्टर, दुकानदार हर तबके के लोग ये बात कहते हैं। पत्रकार से यही उम्मीद करते हैं कि वो सरकार को कसौटी पर कसे लेकिन यह हो नहीं रहा है।

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सारांश सागर

सारांश सागर द्वारा प्रकाशित किया गया

अनुभव को सारांश में बताकर स्वयं प्रेरित होकर सबको प्रेरित करना चाहता हूँ !             


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