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एक सामाजिक चिंतन - आग उगलती दीवारें और दोष उप्पर वाले को !! | Gyansagar ( ज्ञानसागर )


एक सामाजिक चिंतन - आग उगलती दीवारें और दोष उप्पर वाले को !! | Gyansagar ( ज्ञानसागर )


बहुत गर्मी हो रही है , आज हर कोई यही वाक्य बोले जा रहा है और ऊपर वाले पर व्यंग्य और मजाक बनाकर तसल्ली दे रहा है पर कभी आस पास उनको गर्मी बढाने वाले तत्व पर बोलते हुए नही सुना गया !! शुरू से मनुष्य अपने लाभ के लिये प्रकृति का दोहन अंधाधुंध करता रहा और आज भी चंद सुकून के लिये प्राकृतिक रूप से जो भौगोलिक वातावरण है उसे शिमला बनाने में तुला हुआ है !! खैर गर्मी जो बढ़ रही है उसका मुख्य कारण वो लोग है जो अपने स्वार्थ हेतु व्यापारिक दृष्टि से भारी मुनाफा कमाने के लिये सामान बेच रहे है और वो भी जो इन्हें खरीद रहे है बिना ये सोचे कि इसका असर मौसम,प्रकृति और आस पास के क्षेत्र,लोगो मे कैसा पड़ेगा ! सभी से अनुरोध है कि जहां कूलर में काम चल सकता है वहां ऐसी जैसे प्रकृति को हानि पहुंचाने वाली मशीन का उपयोग कम से कम करे य इसके विकल्प पर ध्यान दे , अंधी दौड़ में कृपया शामिल न हो और अपने दिमाग से जीवन को जीने के साधन,सामग्री जुटाए न कि पड़ोसी के घर से तुलना करके !!

सारांश सागर

सारांश सागर द्वारा प्रकाशित किया गया

अनुभव को सारांश में बताकर स्वयं प्रेरित होकर सबको प्रेरित करना चाहता हूँ !             

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