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एक धार्मिक शिक्षाप्रद कहानी - भगवान् विश्वास से साथ है मंदिर की घण्टियाँ बजाने से नहीं | Inspirational Story In Hindi | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

एक धार्मिक शिक्षाप्रद कहानी - भगवान् विश्वास से साथ है मंदिर की घण्टियाँ बजाने से नहीं | Inspirational Story In Hindi | Gyansagar ( ज्ञानसागर )



आज यहाँ जितने भी जानना चाहते हैं की भगवान् होता है या नहीं इसे जरूर पढ़ें । क्योंकि वो सिर्फ विश्वास से है वरना नहीं है । एक बार भगवान् ने अपने चेले से कहा की मै जरा घूम कर आता हूँ तो चेला बोल मै भी साथ चलता हूँ ! भगवान् : तुम क्या करोगे मेरे साथ ? चल के थक जाओगे !
चेला : नहीं थकूंगा ।
भगवान्: ठीक है चलो पर मुझ पर विश्वास रखना और कोई प्रश्न मत करना । वरना तुम्हे वापस आना होगा ।
चेला: ठीक है ।
भगवान् ने चेले के साथ सफ़र शुरू किया । और चलते चलते एक जगह रात हो गयी उन्होंने चेले से कहा जाओ सामने की कोठी में पूछो की हमे रात गुजारने के लिए थोड़ी जगह मिल जाएगी और कुछ खाना भी.
चेले ने दरवाजा खटखटाया । अन्दर से एक नौकर ने दरवाजा खोल और चीख कर बोल क्या है ?
चेला: हम फ़कीर हैं और चलते चलते रात हो गयी है क्या थोड़ा खाना और रुकने के लिए जगह मिल जाएगी हम सुबह चले जायेंगे ।
नौकर : रुको यहीं सेठ जी से पूछता हूँ । पता नहीं कहाँ कहाँ से चले आते हैं (बड़बढाता हुआ सेठ से पूछने चला गया।)
सेठ : ठीक है उन्हें जानवरों को बांधने के स्थान पर रुकवा दो और जो बचाकुचा है खाने के लिए दे दो ।
अगली सुबह भगवान और चेला वहां से रवाना हुए । भगवान् ने आशीर्वाद दिया बसे रहो और सेठ की गाए को बछड़ा हो । चेले को कुछ समझ नहीं आया की जिस सेठ ने पूछा तक नहीं उसे इतना अच्छा आशीर्वाद खैर जानता था की पूछा तो वापस जाना पड़ेगा ।
अगले दिन भी चलते चलते रात हो गयी तो भगवान् ने कहा वो सामने एक छोटा सा घर है जाओ वहां पूछो की वोह हमें जगह दे सकते हैं ?
चेले ने जैसे ही दरवाजा खटखटाया तो उस घर का मुखिया फकीरों को देख कर बड़े प्यार से अन्दर ले गया और अपने स्थान पर बिठा कर भोजन खिलाया और अपने सोने के स्थान पर उन्हें सुलाया ।
सुबह भगवान् और चेले ने वहां से रवानगी ली और भगवान् ने आशीर्वाद दिया तुम फ़ैल जाओ और तुम्हारी बकरी मर जाए । चेले के गुस्सा आ गया और वो भगवान् से पूछ बैठा की ये क्या बात है जिसने पूछा नहीं उसे इतना अच्छा आशीर्वाद और जिसने पूछा उसे नुकसान का आशीर्वाद ।
चेला : ये तो गलत है ।
भगवान्: तुम जानते हो न तुम मुझ से प्रशन पूछ रहे हो क्योंकि तुम मुझ पर विश्वास नहीं कर रहे ।
चेला : जी मै जानता हूँ और मुझे वापस जाना होगा ।
भगवान् : मै तुम्हारे प्रश्नों के उत्तर जरूर दूंगा ।
भगवान् : तो सुनो सेठ गलत था , उसने जो धन कमाया था वो साब धोका धडी और गलत तरीके से कमाया था इसलिए वो सब को शक से देखता था । उसकी सेठानी गर्भवती थी इसलिए मैंने कहा की उसकी गाए को बछड़ा हो जाये पर सेठानी को नहीं ताकि उसका वंश न बढ़े और कहा बसे रहो ताकि तुम अपने अन्दर की गन्दगी को और न फैलाव और यहीं ख़तम हो जाओ और तुम्हे लगा की मैंने उनकी उन्नत्ति का आशीर्वाद दिया है ।
भगवान्: और सुनो इस घर के लोग अच्छे और सच्चे हैं इसलिए अतिथि को आदर दिया और अपने भोजन को हमसे बांटा । इस घर के मुखिया की जो इस घर का सबसे बड़ा स्त्रोत है जीविका के लिए मृत्यु की थी । तो मैंने कहा की इनके बकरी जो इनका धन ही नष्ट कर रही है उसकी मृत्यु हो जाये मुखिया की नहीं । और ये बिखर जाएँ ताकि इनकी अच्छाई और फैले । और तुम्हे लगा की मैंने इनका गलत किया ।
अब चेला रो रहा था और भगवान् मुस्करा रहे थे । क्योंकि उसे समझआ गया था जो हमे सही लगता है वो असलियत में सहीं नहीं और जो हमे गलत लगता है वो असलियत में गलत नहीं।
और भगवान् विश्वास से साथ है मंदिर की घण्टियाँ बजाने से नहीं कृपया करके इस कहानी की लिखित हिंदी को अनदेखा कर गढ़े को समझे !
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सारांश सागर

सारांश सागर द्वारा प्रकाशित किया गया

अनुभव को सारांश में बताकर स्वयं प्रेरित होकर सबको प्रेरित करना चाहता हूँ !                


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