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विवाह बंधन पुरुष-स्त्री का नहीं अपितु दो परिवारों का भी होता है ! | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

विवाह बंधन पुरुष-स्त्री का नहीं अपितु दो परिवारों का भी होता है ! | Gyansagar ( ज्ञानसागर )


आज के समय में वंश बढ़ाने , समाज में अपने परिवार के अंश को जिम्मेदारी देने व् कई उद्देश्यों के साथ विवाह की महत्वता ऋषि मुनियों ने बतलाई है और हमारे पूर्वजो ने भी इसके कई फायदे बतलाये है ! कई तपस्वी का मानना है कि गृहस्थ आश्रम से बढ़कर कोई तप भी नही !! इसीलिए समाज में पुरुष स्त्री के साथ तभी रह सकता है य समाज उसे तभी मान्यता देता है जब दोनों विवाह सूत्र के पवित्र बंधन में बंध जाये अब बदलते दौर पर वक्त बदल गया है ! नये कानून आने के बाद जो जिसके साथ चाहे उतने समय तक रह सकता है !! इस फैसले के बाद ये बात तो निश्चित है कि ये फैसला कामुक लोगो के लिए हर्ष का विषय साबित होगा और जो मान्यताये समाज में घेरे हुए थी कि एक अविवाहित पुरुष और अविवाहित स्त्री साथ नही रहने चाहिए !! वो शायद इस फैसले के बाद बदल जाये ऐसा इस कानून का समर्थन करने वाले लोग मानना शुरू कर दे !! कानून के डर से आप खुलकर उस चीज का विरोध तो बेशक नही कर सकते लेकिन समाज की मान्यतायें ऐसे नहीं बदली जा सकती !! हमारे देश में य कहीं भी एक एक पुरुष य स्त्री में प्रेम होता ही है ! चाहे वो भाई बहन का हो य प्रेमी-प्रेमिका का य अन्य किसीका !! लिव इन रिलेशनशिप के नाम पर आज कई लोग विवाह के पश्चात होने वाले जिम्मेदारी विवाह के पूर्व अपनाने लगे है !! जबकि विवाह ही ऐसा बंधन है जिसका अभ्यास नहीं किया जा सकता ! वो तो बस पहली बार ही होता है ! अपवाद को नजरंदाज करे तो देश में एक विवाह वाले परिवार ही अधिक मिलेंगे !! अब ये सब होने के बाद जो देश में मानसिक बीमारी का प्रचलन तेजी से बढ़ा है उसका कारण है अनियमितता और असंयम !! किसी भी चीज की अति हानिकारक होती है और ये बातें आज के शिक्षा पुस्तक में कम पढ़ाई जाती है ! व्यवहारिक ज्ञान की कमी के कारण , आज पैसे कमाने की कला तो लोग सीख गये है लेकिन शिष्टाचार और स्वस्थ्य तनावमुक्त जीवन जीने की कला को भुला बैठे है !!  आज कई जगह एक और नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है वो है लव मैरिज का तेजी से बढ़ता प्रचलन !! आज बच्चो को माता-पिता बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त करने भेजते है ! अधिक पैसे और अच्छे करियर विकल्प के कारण घर से बाहर रहने को मजबूर होना पड़ता है पर परिस्थिति य गलत संगत के कारण आज के बच्चे माता - पिता के नैतिक शिक्षा को भुला बैठे !! अपनी कामुक इच्छा के स्वार्थ हेतु वो य तो लिव इन रिलेशनशिप य फिर लव मैरिज की जिद्द कर बैठते है ! इसमें गलत और खतरनाक तो दोनों है और ये बताना आज के समय में मुश्किल है कि शहर के बच्चे कितने निश्चल है और कितने नहीं ! ये तो उनका खुद की आत्मा जाने पर सबसे खतरनाक जिस चीज का क्रेज है वो है लव मैरिज का !! आज चंद लम्हों और वर्षो की मुलाकात और मीठी बात से लड़का लड़की अपने आप को एक दूसरे के लिए समर्पित करने को तैयार हो जाते है !! प्रेम करना कोई गलत नहीं है और मैं आपको स्वतंत्र रूप से बताऊँ तो मुझे भी हो गया था , जानबुझकर नहीं किया ! प्रेम करने से य किसीको हमसे करने से हम रोक नहीं सकते लेकिन उसकी मर्यादा अपने हाथो में होती है कि हम उस रिश्ते को कैसा अंजाम देना चाहते है !! त्वरित और आवेश, व्याकुलता में लिया गया फैसला सदैव अनिष्टकारी ही सिद्ध होता है !!


मै खुद के उदाहरण को लेकर अगर बताऊँ तो फेसबुक से शुरू हुआ प्यार व्हाट्सएप्प पर खत्म हुआ और आपसी सुझबुझ और समझ के कारण दोनों ने खुद को अलग करना सही समझा ! मर्यादा रखी और सबसे बड़ी बात प्रेम में भी हमारी बात समाज सेवा और देश की समस्याओ को लेकर अधिक होता था !! विचारधारा जब एक हो तो पार्टनर के साथ जीवन जीने में मजा आना स्वाभाविक है ! मेरे केस में हम कभी मिले नही लेकिन वीडियो कॉल और टेक्स्ट से हमने चंद महीनो में एक दूसरे को अच्छे से जान लिया और समाज और परिस्थिति को समझते हुए उससे अलग होना ही श्रेयस्कर समझा !! पर आज की युवा पीढ़ी य तो आकर्षण को प्रेम समझ बैठते है य रूपये,स्टेट्स और फिगर को देखकर आकर्षित हो जाते है और उसी को प्रेम समझ बैठते है जबकि व्यवहार से अगर प्रेम हो तो वही प्रेम टिकता य अमर होता है !! प्रेम के लिए बस गुण-व्यवहार जरूरी है अन्यथा हर दंपति आज सर्वगुण-सम्पन्न होते ! जब एक व्यक्ति को दूसरी व्यक्ति की आदते अच्छी य झेलने लायक लगती है तो वो उसके साथ जीवन जीने के लिए तत्पर रहते य खुशीपूर्वक जीवन जीते है ! अपवाद तो इसमें भी है कि कई परिवार घरेलू हिंसा का शिकार होते है ! कहीं पर पुरुष तो कहीं पर स्त्री इसका शिकार होती है ! लव मैरिज करने वाले को ये ध्यान में रखना चाहिए कि आपकी पसंद आपके लिए तो उचित और सही है लेकिन सामाजिक मर्यादा और तौर-तरीके की दृष्टिकोण से अगर देखा जाये तो एक विवाह में पुरुष और स्त्री के साथ उन दोनों परिवार का भी मिलन हो जाता है ! वो एक दूसरे के सगे सम्बन्धी बन जाते है !! ये तब ही जब लव मैरिज करने वाले माता-पिता की मर्जी य उन्हें जिद्द करवाकर विवाह कर ले ! भागने - भगाने वाले जोड़ी का श्रारीम जाने ! अपवाद पर चर्चा करना उचित नहीं क्योंकि उनका भविष्य व उनकी जोड़ी की मजबूती ईश्वर ही निर्धारण करते है समाज नही !! और अगर जब विवाह से एक दूसरे के परिवार वाले सगे सम्बन्धी बनते है तो निश्चित है कि ऐसे समारोह य आने वाले विवाह पश्चात किसी समारोह में एक दूसरे को आमंत्रण तो जायेगा ही जायेगा ! और आमंत्रण में किसी परिवार की सामाजिक,आर्थिक स्थिति किसी दूसरे वाले से निम्न हुयी तो शर्मिंदगी हो सकता है तो दोनों में किसी एक को य दोनों को हो !! ये लड़का लड़की अपने प्यार में नहीं सोचते !! उन्हें तो सिर्फ अपने प्यार से मतलब है !! एक कुता भी समाज की चिंता नहीं करता ! वो खुलेआम कुतिया के साथ सम्बन्ध बनाता है और बच्चे पैदा करता है !! फर्क बस इतना है कि एक में मंत्र पढ़ा जाता है और एक में नहीं !! हम मनुष्य है और मनुष्य को ही संयम,मर्यादा,सामजिक प्रतिष्ठा का सम्मान प्राप्त होता है और विवाह में जोड़ी की पसंद बहुत लम्बे समय से माता-पिता ही करते आये है !! अपवाद यहाँ भी है कि कई बार बच्चो की पसंद भी सर्वश्रेष्ठ हो सकती है लेकिन किसी चमत्कार को हर किसी के जीवन का अंग नहीं मानना चाहिए !! हर स्त्री चाहती है कि उसका ससुराल उसे मान-सम्मान दे ! बेटी जैसा प्यार दे ! मुझे मेरे परिवार से घुल-मिलकर स्नेह से रहे और यही दूल्हा ( लड़का ) भी चाहता है ! पर लव मैरिज के केस में हो सकता है माता-पिता को झुकना पड़े बेमन से पर अंदर से वो कभी भी वो लड़का य लड़की को अपना नही पाते है य उनके परिवार को, क्योंकि स्टेट्स नामक कीड़ा कहीं न कहीं दोनों परिवार में से कहीं न कहीं समस्या पैदा कर देता  है !! अपने जाति बिरादरी से बाहर विवाह करना गलत माना जाता था जिसके अपने एक तर्क है लेकिन अगर आपके बिरादरी य जाति में उपयुक्त लड़का-लड़की है तो क्या दिक्कत है उससे विवाह करने में !! खैर ये अपनी निजी इच्छा,जरूरत और चाहत है जिसे मेरा लेख य कोई अपने ज्ञान,सुझाव से बदल नही सकते लेकिन हाँ उन सबसे एक सलाह जरुर है कि खुद की खुशियाँ अच्छी बात है पर अनुभव भी एक चीज है ! बच्चा जब पापा की गोदी में होता है तो खिलौने के दुकान के साथ हर दुकान की चीज पर पड़ी चीजो को लेने की जिद्द करता है पर पापा उसे उसके योग्य की वस्तु ही देते है जैसे कोई अच्छा खिलौना !! किस पापा को सुना है कि अपने बच्चे को लोडेड गन दे दी ?? वैसे हर एक अच्छी दिखने लगने वाली चीज जरूरी नही अच्छी ही हो ! हो सकता है उसका परिणाम आप न देख पा रहे हो !! आपकी दूर दृष्टि सीमित हो !! खैर छोड़िये !! अंत में एक बात चाणक्य ने कही थी वो ये है कि निचले कुल में जन्मी स्त्री अगर योग्य-गुणवान और चरित्रवान हो तो उससे भी विवाह उचित है ! बेशक उसके सगे सम्बन्धियों का आपको त्याग करना पड़े !! मेरा ये लेख सभी युवक-युवतियों के उज्ज्वल भविष्य को सुदर तरीके से जीने के लिए प्रेरणा देने वाला है ! उम्मीद है आपको अच्छा लगे व् पसंद आये !! मै अविवाहित जरुर हूँ पर अनुभव और समाज के बीच कई किस्से कहानियो को सुनकर इतना जरुर काबिल हो गया हूँ कि ये बतला सकूं विवाह में पुरुष में पुरुष व् स्त्री को चुनने के लिए जरूरी नियम कायदे क्या क्या होने चाहिए !

Saransh Sagar

सारांश सागर

सारांश सागर द्वारा प्रकाशित किया गया

अनुभव को सारांश में बताकर स्वयं प्रेरित होकर सबको प्रेरित करना चाहता हूँ !             


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