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एक सामाजिक चिंतन - शादी लव हो य अरेंज रिश्ते की बुनियाद सम्मान और विश्वास पर टिकी है | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

एक सामाजिक चिंतन - शादी लव हो य अरेंज रिश्ते की बुनियाद सम्मान और विश्वास पर टिकी है | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

कड़वा है पर सत्य है !! 

बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को सहन करने वाला समाज आज प्रेम विवाह को बर्दाश्त नही कर सकता ! जितना विरोध इस पर लोगो का आता है उतना ऐसे अपराध करने वाले लोगो के विरोध , अपराध को बढ़ाने वाले कारक य उन परिवार के प्रति सहानुभूति के प्रति नही !! ऐसा क्यों ??  क्या कारण है कि 
सामान्य मनुष्य ऐसे शादियों को करने में तो खुश होते है  और वहीँ अगर अविवाहित है तो क्रोध से भर जाते है, यदि यही निर्णय आपके छोटे भाई य बहन का हुआ य आपके परिवार के किसी सदस्य का तो फिर तो बम फटना तय है !!
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आज समय बदल गया है और युग भी और परिस्थिति भी !! लोगो को समझना होगा , समान जाति में विवाह करना अच्छा इसीलिए माना जाता था क्योंकि पहले व्यक्ति उस जाति में होने वाले नियम,कायदे,कानून और रीति ,संस्कृति से भली भांति परिचित होते थे ! हमारा देश परम्पराओं का धनी देश रहा है आरम्भ से और ऐसे में अन्य जाति में विवाह करना गलत इसीलिए माना जाता था ताकि वर-वधु य उनके परिवार वालो को एक दूसरे के साथ रिश्ते बनाने में काफी कठिनाई हुआ करती थी और अपने बिरादरी में काफी फायदे थे न केवल संस्कृति के बल्कि अन्य रहन-सहन व् व्यवहार के सहूलियत भी थी ! 
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लेकिन आज देखने में ये मिल रहा है कि वक्त समाज अब वो नही रहा और वर्तमान युग में कार्यक्षेत्र में काफी इजाफा हुआ है और इस कारण जो नियम पहले थे वो भी अब भी लागू होगा कि जहा वर-वधु एक दूसरे को समझने में सक्षम हो , एक दूसरे के पसंद-ना पसंद को सहन कर सके और साथ ही उनके विचार में तालमेल अवश्य हो , एक दूसरे के लिए सम्मान और विश्वास की भावना हो और अगर ये सब बातें मेल खाती हो तो जाति एक ही हो य अलग रिश्ता आपका विश्वास और सम्मान के बदौलत टिका रहेगा ! मेरे काफी मित्रो ने लव मैरिज किया है ! निजी रूप से मै इसके खिलाफ हूँ क्योंकि समाज में इसको शुरू से अच्छा नहीं माना गया है इसका कारण ये भी है कि लव मैरिज का पर्याय प्रारम्भ से ही कोई भी साधारण मनुष्य ये समझ लेता है कि परिवार के विपक्ष होकर विवाह करना लेकिन आज लव मैरिज की भी परिभाषा बदल गयी है ! इसका अर्थ आज ये हो गया है कि विवाह से पूर्व पुरुष-स्त्री पहले से ही प्रेम करते रहे है ! 
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रिश्तो की मर्यादा रही और परिवार के सर्व-सम्मति से विवाह सम्पन्न हुआ ! ये आज लव मैरिज की परिभाषा वर्तमान समय में है , कुछ लोग इसे ल्वअरेंज भी कहते है लेकिन कुछ लोग विवाह से पूर्व ही स्वतंत्रता का दुरूपयोग कर लेते है मै उसपर टिप्पणी नहीं करूँगा, वो उनका निजी मामला कहे य अधिकार है , वो चाहे कुछ भी करे !! मेरा ये लेख , उन लोगो के लिए है जो बेचारे सम्मान से जीवन यापन करना चाहते है ! एक दूसरे को पसंद करते है और समाज में उनका अच्छा नाम व् रुतबा है और अच्छे संस्कार से वो समाज में प्रतिष्ठित है फिर क्या वजह है कि उनके परिवार य वो समाज ऐसे रिश्तो को विवाह जैसे बंधन में एक होने की इजाजत नही देता ?? आज किसी चमत्कार से कम नही है कोई अच्छा लड़का य लड़की मिलना नहीं तो हर लड़का य लड़की का अफेयर का ड्रामा होता ही है और अगर ड्रामा सिर्फ प्यार तक रहा तो ठीक है वरना कोई पुरुष य स्त्री अपनी कामना के लिए चौके-छक्के मार ही देते है ! लेकिन ये सब बातें विवाह के बाद अगर पता चलती है  तो रिश्तो को लज्जित और खराब तो करती ही है साथ में उन दो परिवारों के बीच एक कडवाहट को भी जन्म दे देती है और अगर किसी वजह से राज राज ही रहा और पुरुष य स्त्री जिसका मनोवांछित वर य वधु नही मिल पाता उसके हृदय में एक टिस तो बनी ही रहती है !! 
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हमे समझाना होगा कि जितना हम रीति रिवाजो और जाति-कास्ट का भ्रम दिमाग में डालेंगे इतना ये कास्टइस्म कष्ट ही देगा ! समझना होगा मूल कारणों को जिनके लिए ये नियम बनाये गये थे लेकिन नियमो के मूल को भूलकर आज का समाज बस तुगलकी फरमान सुना देते है और शायद इसीलिए ये विवाह के वदले मै तेरा बॉयफ्रेंड तू मेरी गर्लफ्रेंड का ड्रामा शुरू हुआ करता था ! मुझे याद है मेरे दादा दादी की कोई गर्ल फ्रेंड नही थी न ही नाना नानी की !! कोई पसंद होता होगा तो मन में ही रखते होंगे लेकिन आज क्या है कि आज के बच्चे घोड़े जितने बड़े हो गये है ! होर्मन ज्वालामुखी जैसे फूट रहे है और सोशल मीडिया का नैन मट्टका य फिर आँखों का नैन मट्टका एक कैटेलिस्ट का काम करते है और अगर ये रिश्ता प्यार का परवान चढ़ता है और उसे एक दिशा देने के लिए विवाह की बात पर पहुंचता है तो ऐसे परिवार और समाज उसे न कहते है और तरह तरह के धमकी य हतकंडो से उनपर जबरदस्ती रोक लगाते है और तभी शायद ये भागने भगाने का प्रचलन बढ़ा होगा ! यदि समाज और परिवार अपने बच्चो पर ये अंकुश नहीं लगा सकते कि वो किससे प्यार करे और किससे नही तो कोई हक नहीं है उनका ये कहने का कि इससे शादी करो इससे नहीं ! पूछताछ और योग्यता की परख और परिक्षण हर माँ-बाप को करनी चाहिए , चाहे वर हो य वधु लेकिन अगर वर-वधु के परिवार दोनों योग्य हो और सक्षम और समझदार और दोनों एक दूसरे को पसंद करते हो तो फिर जाति और समाज के बहाने कैसे आप दोनों को अलग कर सकते है !! उसके लिए कोई ठोस तो तर्क होना चाहिए !
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 कई बार मैंने देखा है कि कुंडली मिलान को बहुत अनिवार्यता दी जाती है विवाह में ! वैसे भागकर शादी में लोग वो भी नहीं देखते ! बिना कुंडली के ही शादी कर लेते है ! ऐसे में य तो वो जोड़ी स्वर्ग का जीवन जीते है य फिर नर्क का क्योंकि सिक्के के दो परिणाम की तरह उनका भी यही हश्र होता है !! लेकिन अगर जोड़े के कुंडली मिलन भी उत्तम हो तो क्या बुराई है विवाह में !! मैंने देखा है आज के समय में जो भी विवाह अरेंज हुए उसमे काफी ऐसे घटनाये है जिसमे दहेज उत्पीड़न,मर्डर,केस,अकाल मृत्यु और तमाम चीजे हुयी तो क्या कुंडली मिलान उसमे नहीं होता था क्या ?? कहने को पंडित सिर्फ अपने जीवन यापन के लिए सारे यंत्र लगा ही देते है जोड़ी के मिलान के लिए कभी कभी लेकिन ये कहना गलत नही होगा जोड़ी भगवान ही बनाते है और यदि आपको अपने प्यार पर भरोसा है और वो प्यार विश्वास और सम्मान पर टिका है तो यकीनन किसी कुंडली य निर्णय की मोहताज नही क्योंकि उस व्यक्ति के साथ जीवन आपको जीना है न की उसको जो मना कर रहा है य हाँ कर रहा है ! ये पूर्णतः आपका फैसला है कि आपको क्या चाहिए ! वो माँ बाप जो कुछ सालो बाद गुजर जायेंगे य वो झूठी शान की इज्जत जिसके लिए आप एक अच्छे भले इंसान को प्यार की गोली देकर किसी और के होलिये ! फैसला आपका है और जीवन आपका ! क्योंकि कुछ वर्षो बाद वो समाज य वो परिवार आपके द्वार पर थूकने तक नही आने वाला ! सब बोलते है ! अच्छा करो तब भी बोलेंगे टोकेंगे और बुरा करो तो बोलने के साथ कूटेंगे अलग !! 

मेरे प्यारे प्रेमियों ! होशियार रहो ! जरूरी नही जन्मदाता की वाणी ईश्वर की वाणी हो ! शांतचित से हृदय की आवाज सुनिए और वही आवाज ईश्वर की आवाज होगी और हाँ अगर माता-पिता य समाज नही मान रहा है तो ऐसे कई उदारहण है वर्तमान समय में जिनका प्रेम विवाह हुआ और आज वही मना करने वाला परिवार समाज उनके बच्चो का दादा-दादी य नाना-नानी है और अब सब साथ है खुश है ! बाद में खुद कहते है वो लोग कि एक झूठी शान और ईगो के लिए हमने बहुत कुछ कई सालो के लिए खो दिया !! 

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Saransh Sagar


सारांश सागर

सारांश सागर द्वारा प्रकाशित किया गया

अनुभव को सारांश में बताकर स्वयं प्रेरित होकर सबको प्रेरित करना चाहता हूँ !             


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