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सारा दोष सिर्फ सरकार का कैसे ?? - एक सामाजिक समस्या विषय पर आधारित लेख | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

सारा दोष सिर्फ सरकार का कैसे ?? - एक सामाजिक समस्या विषय पर आधारित लेख | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

हम रोज सुबह उठते है , कोई स्कूल जाता है तो कोई कॉलेज तो कोई अपने काम में और छोटे बच्चे हो तो उनका अलग लालन पालन वाला दिनचर्या ही होता है ! और कई लोगो की आदत होती है सुबह उठते ही अख़बार य टीवी में न्यूज सुनना और सरकार को कोसना शुरू य अपना ज्ञान देना शुरू ! कभी घर से बेशक निकले न हो ऐसे मुद्दों पर कुछ काम करने के लिए !! लेकिन टीवी के सामने सेफ जोन पर बोलकर अपने बच्चो और सगे सम्बन्धियों के सामने ऐसे हितैषी बनते है जैसे सबसे बड़ा काम वही कर रहे है ! कुत्ता भी अपने घर में शेर होता है और मालिक के घर से हर व्यक्ति पर कई बार बेवजह भौंकता है तो क्या हममे और उस कुत्ते में अंतर है ?? क्या हम वाकई में समाज में होने वाले अन्याय के प्रति जवाबदेह है य फिर जब जब न्यूज देखते है तब तक ही ये सब ढोंग हम करते है ! कभी कभी तो ऐसा लगता है कि सुबह खबरे नही चली तो देश दुनिया में क्या हो रहा है कुछ पता ही नही चल सकता ! ऐसे समय में जहाँ आधुनिकता इतनी बढ़ रही है वहां पर सत्यता को तोड़ मरोड़ को पेश करना कठिन तो हो जाता है पर अर्ध्य सत्य बोलकर य दिखाकर लोगो को गुमराह जरुर कर दिया जाता है !! 

बीते कई सालो से न्यूज़ को देख रहा हूँ और फिर जीवन में राजीव दीक्षित के व्याख्यान से सामना हुआ जिसके बाद मुझे तमाम चीजो को क्रोस चेक करने में आनंद तो आता ही साथ ही जिम्मेदार नागरिक होना का भी अहसास होने लगा ! कोई भी चीज ऐसे ही आपको परोस के रख दी जा रही है और आप उसे देखकर सच मान रहे है य हवाला देखकर कि टीवी पर कोई कैसे झूठ बोल सकता है तो मै आपको बता दूँ नापतोल वाले हो य २००० के नोट में ट्रांसमीटर बताने वाले य फिर टीवी पर कलाकार के चेहरे की पहचान करने वाले सभी के सभी फेक और बहुत बड़ा झूठ था और ऐसे हजारो झूठ शायद आपने देखे हो य महसूस य ठग के शिकार भी हुए हो पर देश की जनता क्योंकि बहुत ही भोली है और पढ़े लिखे और अनपढ़ को जितना मै समझ पाया हूँ उसमे ये साफ है कि पढ़ा लिखा वो है जिसे आपकी भावनाओ की कद्र नही य जो अपने भावनाओं पर नियंत्रण पा लेता है और अनपढ़ वो है जो अपनी भावनाओं को खुद पर हावी होने देता है !! 

कभी कभी ऐसा लगता है हमारे आस पास मीठे तोते वाले ऐसे लोग है जो सिर्फ अपने काम से मीठी मीठी बात करते है और काम होने पर खिसक लेते है !! देश में ऐसे बहुत ही पापी लोग मिलेंगे जिसमे सबसे बड़े वाले पापी वो है जो अन्याय और गलत होता हुआ देखकर सहते और चुप रहते है !! गलत करने वाले के अपने कर्म है , भाग्य है और आदत है पर अच्छे व्यक्ति के लक्ष्ण जिसमे है वो उस समय चाणक्य य कृष्ण के ज्ञानोपदेश का हवाला देखकर खिसकने में ही भलाई समझता है !! देश में आज हर गली , हर गली मतलब हर गली में जब मै किसी काम से निकलता हूँ तो कोई नशेड़ी से सामना हो ही जाता है !! 

बता दूँ पहले बीडी पीना भी बहुत गलत माना जाता था पर आज अपनी छत पर एक अनजान सक्श को जब मैंने पकड़ा तो उसने कहा ये तो सब पीते है ! तब मुझे लगा हमसे बड़े जो सीनियर सिटीजन है कहीं न कहीं वो ऐसे मामले में रोका-टोकी करने से बचे य उन्हें सिगरेट,नशे की चीजे काफी रास आती थी तभी तो आज हर चौराहे पर कोई डाक्टर य फल वाला बेशक न हो पर गुटखा सिगरेट के दूकान जरुर मिल जायेंगे और अब आप एक बात बताइए !! कुछ सौ में गिनती है सरकार के सदस्य की और उसके बदले में करोड़ो देश की जनता !! सही क्या गलत क्या अब क्या ये भी कानून तय करेगा य मनुष्यता य हमारी विवेक !! मुझे समझ नही आता कि जब अपनी पर बात आ जाती है तब इंसान पूरा जोर लगा देता है उसे कुचलने , हराने य मारने के लिए पर जो समस्या पूरे देश में फ़ैल रही है उससे क्षेत्रीय स्तर की संस्कृति प्रभावित और मिलावटी होती जा रही है और ये सब देखकर आग लगाने का ही जी चाहता है !! सारे नेता चोर है पर उससे भी पहले जनता खुद चोर है और जनता को अपने गिरेबान में झाँकने की जरूरत है कि क्या वो अपना फर्ज अदा कर रही है ?? अगर हाँ तो ये सरकार तो इन्ही जनता में से चुने जाते है !! क्यों न पहले खुद की गंदगी साफ की जाये !! और एक स्वस्थ्य समाज का निर्माण किया जाये ! 

गुटखा,तम्बाकू,सिगरेट,बीड़ी,चरस,गांजा और न जाने क्या क्या बाजार में खुले आम बिक रहे है !! लोग सेवन भी कर रहे है और इससे समाज काफी दूषित और मलिन होता जा रहा है !! सरकार से गुहार लगाने के बजाय अपने माहौल को ऐसे तत्व बढ़ाने वाले से रोकने का प्रयास करना चाहिए ! अंकुश लगाना चाहिए और रोक टोक करनी चाहिए !! मेरा प्रण तो यही है कि हर उस व्यक्ति का बहिष्कार करे जो ऐसे नशीली वस्तुओ का सेवन खुले आम करके बेह्यापन का परिचय दे !! समाज में खुसबू छोड़िये अच्छी हवा नही मिलती आज साँस लेने के लिए अगर यूँ ही चलता रहा तो कोरोना वायरस तो बाद में पहले इंसान ऐसे गैर क़ानूनी और अवैध शिक्ष्ण संस्थानों के बगल में खुलने वाले नशीली वस्तुओ के दुकान से मर जायेगा !! मै महसूस कर रहा हूँ कि ये देश मानसिक गुलाम हो चूका है जिसे ये भी नहीं पता कि उसकी बीमारी क्या है और आज हम बस कठपुतली की तरह बस उपभोक्ता बनकर मात्र सेवन ही करे जा रहे है !!! 
थोड़ा विचार करियेगा कि क्या आप अपने आस पास के माहौल से खुश है !!
 
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Saransh Sagar


सारांश सागर

सारांश सागर द्वारा प्रकाशित किया गया

अनुभव को सारांश में बताकर स्वयं प्रेरित होकर सबको प्रेरित करना चाहता हूँ !             


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