Arun Govil Biography In Hindi | अरुन गोविल जी की जीवनी | Biography In Hindi

Arun Govil Biography In Hindi | अरुन गोविल जी की जीवनी | Gyansagar ( ज्ञानसागर )
अरुन गोविल जी की जीवनी | Biography In Hindi

नमस्कार दोस्तों ! आज हम आपको बताने जा रहे है एक ऐसे शक्श के बारे में जो बॉलीवुड सहित पूरे विश्व में पूजनीय है और इनके नाम य किरदार का जब भी जिक्र होता है तो पुरे श्रद्धा से लिया जाता है ! इनका नाम है अरुण गोविल जी ! तो चलिए शुरू करते है उनके जीवनी पर आधारित लेख साथ ही अपने मित्रों,सम्बंधियो को साझा करना न भूले ! जयश्रीराम 



पूरा नाम अरुण गोविल
प्रसिद्ध नाम - श्री राम 
जन्म - 12 जनवरी 1958
जन्म भूमि - मेरठ ,उत्तरप्रदेश , भारत
पत्नी - श्री लेखा 
पिता - चंद्रप्रकाश गोविल 




ये वो शक्श है जिनके अदाकारी के दम पर ये जनमानस के दिलो दिमाग के साथ साथ मन में भी बस गये और पूजनीय हो गये । ये किस्सा वर्ष 1987 का है जब छोटे पर्दे पर रामायण की शुरुआत हुई। उस समय देश में एक मात्र मनोरंजन का चैनल दूरदर्शन और कुछ घरों में टीवी हुआ करता था। ऐसे में रामायण का प्रसारण देश के लोगों को एकजुट कर देता था और रामायण की T.R.P. काफी हाई रहती थी । पूरे देश में एक अलग ही माहौल था। इस ऐतिहासिक सीरियल को देखने के लिए तब कर्फ्यू लगने जैसी स्थिति पैदा हो जाती थी। लोग टीवी के सामने बैठते तो सीरियल खत्म होने के बाद ही उठते। इन्होने 80 के दशक में V.P. सिंह के खिलाफ कांग्रेस पार्टी से चुनाव भी लड़ा। लेकिन हार गए क्योंकि ज्यादातर वोटर्स ने बैलट पेपर पर जय श्री राम लिख दिया था।  



वह रामायण धारावाहिक ही था जिसने अरुण गोविल की जिंदगी को बदल के रख दिया। जब ये पांचवी कक्षा में थे ये तभी से नाटकीय कार्यक्रमों में भाग लिया करते थे। रामलीला में राम का किरदार भी निभाते थे। अरुण जी के पिता जी भी हर पिता की भांति यही चाहते थे की उनका बेटा भी सरकारी नौकरी करे। अरुण गोविल ने श्रीलेखा से विवाह किया। जिनसे उनके एक बेटा अमल गोविल और एक बेटी सोनिका गोविल है।

अरुण गोविल जी व् उनकी पत्नी श्री लेखा 


अरुण के भाई विजय गोविल का मुंबई में बिज़नेस था। इसलिए अरुण 1974 में मुंबई चले आये। अरुण वैसे तो मुंबई बिजनेस करने आए थे लेकिन उनका मन उस कार्य में बिलकुल नहीं लगता था। उनपर एक्टिंग का जुनून सवार हो गया और उन्होंने एक्टिंग का दामन थाम लिया। हालांकि, अभिनय में करियर बनाने के बारे में उन्होंने कभी नहीं सोचा था। उनको लगने लगा की अभिनय के छेत्र में मैं अपना अलग मुकाम बना सकता हूँ। इस जहाँ में कुछ प्रतिशत ऐसे लोगों का भी है जो चाहते हैं की जिंदगी में कुछ ऐसा किया जाए जिससे वो हमेशा के लिए अमर हो जाएँ। लेकिन ये मुकाम हासिल करने के लिए सपनो का जिन्दा रहना जरूरी है। क्योंकि सबसे बुरा होता है सपनो का मर जाना। अरुण गोविल का भी यही सपना था और उन्होंने अपना मुकाम हासिल भी किया।
 

फ़िल्मी करियर की शुरुआत के लिए ये फिल्म निर्माताओं के पास भटकने लगे। भटकते भटकते तीन साल बीत गए। 1977 मैं इन्हे पहली बार मौका मिला राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म पहेली में। इस फिल्म में इनके अभिनय से प्रभावित होकर तारा चाँद बड़जात्या ने उन्हें तीन और फिल्मो के लिए साइन कर लिया। फिर 1979 में आयी फिल्म सावन को आने दो इनके फ़िल्मी करियर का सितारा चमक गया। 80 के दसक के अंत तक लगातार कई फिल्मो जैसे इतनी सी बात, जुदाई, हथकड़ी, दिलवाला, श्रद्धांजलि, हिम्मतवाला, शत्रु, आसमान, अय्याश आदि फिल्मो में काम किया।
 

जैसा आप भी जानते हैं मायानगरी में अधिकांश कलाकारों को सिगरेट और मदिरा की लत लगी होती है। अरुण गोविल को भी सिगरेट की लत लगी हुई थी। 1987 में रामानंद सागर ने रामायण धारावाहिक बनाना शुरू किया। अरुण गोविल जी रामानंद सागर के ऑफिस ऑडिशन देने पहुंचे। रामानंद सागर जी ने इन्हे रिजेक्ट कर दिया। क्योंकि रामानन्द सागर जी चाहते थे की जो व्यक्ति राम का किरदार निभाए उसमे किसी भी प्रकार का दुर्गुण न हो। अरुण जी को सिगरेट की लत थी जिस के चलते उन्हें काम देने से मना कर दिया था। रामानंद सागर ने उनके सामने शर्त रखी की जिंदगी भर सिगरेट को हाथ नहीं लगाओगे और जब तक तुम रामायण सीरियल में काम करोगे तब तक तुम्हे अपनी छवि राम की तरह ही बना कर रखनी पड़ेगी। और इस तरह इन्हे मिला राम का किरदार। और इस किरदार ने इन्हे हमेशा हमेशा के लिए अमर कर दिया।  


राम का किरदार निभा कर इन्होने दर्शकों के मन मस्तिष्क पर कुछ ऐसी छाप छोड़ी दर्शक इनकी तस्वीर की पूजा करने लगे। जब भी ये घर से बाहर निकलते तो लोग इनके पैरों में गिर जाते। समस्याएं सुनाने लगते। इसमे एक किस्सा ये भी है की दिल्ली में एक सख्श ने पार्टी रखी थी। जिसमे अरुण गोविल भी आमंत्रित थे। अरुण गोविल अपने साथी कलाकारों के साथ डिनर कर रहे थे।  तभी पार्टी के आयोजक अपनी माँ को वहां लेकर आ गए और बताया की माँ यही वो राम हैं जिन्हे आप पूजती हैं। वो महिला 80 के आस पास की उम्र की थी। वो महिला अरुण गोविल को देखते ही उनके पैरों पर लेट गयी। अरुण गोविल ये सब देख कर अचंभित हो गए और उन महिला को उठने के लिए कहा। ऐसे बहुत से किस्से मिलेंगे जो आप और हम काफी जानते है ! लोग आज भी इनके तस्वीरों की पूजा करते है और जब भी ये कोई सामान लेने य खरीदने जाते थे तो लोग इनसे पैसा लेना पसंद नही करते थे ! शायद ये इनके पुण्य कर्म होंगे जिनके कारण आज ये इतने पूजनीय बन गये है ! 

ये भी पढ़े  - रामानंद सागर जी की जीवनी 

दूसरा किस्सा ये है की एक बार रामायण धारावाहिक प्रसारण के दौरान अरुण गोविल उत्तर प्रदेश के किसी गाँव से गुजर रहे थे। उन्होंने अपनी कार रोक कर सड़क किनारे एक घर में गए जहाँ एक सख्श अकेला बैठे टीवी पर रामायण देख रहा था। वे वही बैठ कर रामायण देखने लगे। उस व्यक्ति को किसी के आने का आभास हुआ। उसने पीछे मुड़ कर देखा और पुनः रामायण देखने लगा। लेकिन अचानक से उसे कुछ शक हुआ और दोबारा देखा और अरुण गोविल का चेहरा राम से मिलाने लगा। जैसे ही उसने पहचाना वो तुरंत गावं में भागा और चिल्लाने लगा मेरे घर भगवान् राम आये हैं। सोचिये कितना अविश्वसनीय पल होगा वो जब इस तरह की घटना घटित होती होगी ! आज अगर किसी देवी देवता को सच में देख ले तो कैसा लगेगा शायद जीने का मन ही न करे य आँखों से आंसू आ जाये और वो भक्त इस ख़ुशी को सबके साथ साझा करने गाँव में दौड़कर सबको ये बताने लगा ! जय हो प्रभु श्री राम की ! 

सुनील लहरी ( लक्ष्मण ) व् अरुण गोविल ( श्री राम )

लगातार तीन साल रामायण सीरियल को पूरा करने के बाद जब इन्होने फ़िल्मी दुनिया में वापसी की तो दर्शकों ने इन्हे अन्य किसी रूप में स्वीकार नहीं किया। इसके बाद इन्हे लगातार धार्मिक सीरियल और फिल्मों में काम ऑफर होने लगे। लेकिन अरुण जी अपनी इस छवि से बाहर निकलना चाहते थे।  इसलिए इन्होने कई फिल्मो में बोल्ड और नेगेटिव किरदार भी निभाए। लेकिन अपनी राम वाली छवि को दर्शकों के मस्तिक से नहीं हटा पाए। क्योंकि जिस भावना से जनता ने उन्हें श्री राम प्रभु के रूप में अपनाया था वो इतना सरल और भक्तिमय कर देने वाला था जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती थी ! राम छवि में अक्सर यही नजर आया करते थे और इनके बाद काफी रामायण बनी लेकिन कोई इस भावना से नहीं बना पाया जैसा रामानंद सागर जी ने बनाया और उनके किरदारों ने बखूभी उस किरदार को निभाया ! 

विक्रम व् बेताल का दृश्य 

राम का किरदार निभाने के बाद अरुण ने रामानंद सागर के एक और मशहूर शो ‘विक्रम और बेताल’ में राजा विक्रमादित्य का किरदार निभाया था। हालांकि यह कहा जाता है कि इसकी तैयारी रामायण सीरियल से पहले की जा चुकी थी।

राम का किरदरा निभाने के बाद अरुण ने ‘लव कुश’, ‘कैसे कहूं’, ‘बुद्धा’, ‘अपराजिता’, ‘वो हुए न हमारे’ और ‘प्यार की कश्ती में’ जैसे कई पॉपुलर टीवी सीरियल में काम किया.
जिसे हर घर में पहचाना जाने लगा हो, उसे काम मिलना बेहद मुश्किल हो रहा था। अरुण को लोग राम के रूप में ही देख रहे थे, इसलिए उन्हें कोई और किरदार नहीं मिल रहे थे। जिस वजह से उनका एक्टिंग करियर खत्म हो गया। उसके बाद वो करीब 9 से 10 सालों तक टीवी की दुनिया से दूर रहें.

अरुण एक चमकते सितारे थे, लेकिन उनके पास काम नहीं था जिस वजह से उन्होंने प्रोडक्शन का काम संभाला. अपने को- स्टार सुनील लाहिड़ी यानि रामायण के लक्ष्मण के साथ मिलकर उन्होंने अपनी एक टीवी कंपनी बनाई, जिसके तहत वह कार्यक्रमों के निर्माण से जुड़े रहे और इसमें उन्होंने मुख्य रूप से दूरदर्शन के लिए कार्यक्रम बनाए.

अरुण गोविल ने राम की छवि से बाहर निकलने की भी काफी कोशिश की, फिल्मों में बोल्ड सीन्स किए, कुछ धारावाहिकों में नेगेटिव किरदार निभाया, लेकिन अफसोस वो राम की छवि से कभी बाहर नहीं निकल पाए। भले ही ‘रामायण’ को लगभग तीन दशक हो गए हों, पर अरुण जी जहाँ कहीं जाते हैं वो आज भी राम के रुप में पूजे जाते हैं। राम को मानने वाले अरुण जी में ही राम को देखते हैं। और हो भी क्यों न ! जो अदाकारी व् अभिनय इन्होने किया है उन्होंने श्रीराम के कर्तव्यो व् मर्यादा पुरुषोत्तम के संदेश को जनता में उनकी बातो को अमल में लाने का प्रयास किया है !! आशा है रामानंद सागर जी के इस रामायण धारावाहिक का आनंद कोरोना के टाइम lockdown में आप भी आनंद ले रहे होंगे ! 

ये जीवनी इंटरनेट रिसर्च व् उनके इंटरव्यू पर आधारित है ! उम्मीद है हमारी छोटी सी कोशिश आपको पसंद आई होगी ! कृपया रामभक्तों में शेयर जरुर करे !


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1 Comments

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