युवाओं के लिए प्रेरणादायक कहानी | Yuvao Ke Liye Preranadayak Kahani | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

नमस्कार पाठको आज हम आपको बताने जा रहे है युवाओं के लिए प्रेरणादायक कहानी जो आपको अवश्य पढ़नी चाहिए ! ये कहानी हालाँकि सच्ची घटना यानि रोजमर्रा के जीवन में विद्यालय में आपके साथ भी घटित होती होगी लेकिन फिर भी मुझे लगा आप तक ये कहानी अवश्य बतानी चाहिए !!  चलिए जानते है कहानी का विषय क्या है !!

युवाओं के लिए प्रेरणादायक कहानी

कहानी का शीर्षक - प्रयास जरूरी है 

कहानी का विषय है - नैतिक शिक्षा का महत्व  और पात्र है मेरे स्कूल के टीचर जो कि बहुत ही तेजस्वी और कट्टर छवि वाले है ! श्री केपी सर ! अभी उनसे मुलाकात भी नही है न ही उनका कुछ ख़ास पता है कि वो अब कहाँ है ,, कैसे है लेकिन गुरु जी की वो बात याद आज भी है जिसे वो बार बार दोहराया करते थे और जिसके शब्द मेरे कान में आज भी मुझे प्रेरित करते है वो है !! अरे हरामजादो बिना रोये बच्चे को भी माँ दूध नही पिलाती तो जब तक पूछोगे नही तो कैसे मै हल बता दूँ ! उनके शब्द कठोर और गलत जरुर होते थे पर हर एक शब्द में बच्चो के लिए सीख होती थी !! स्कूल में बहुत कम ऐसे ईमानदार और निष्ठावान सर होते थे जो समय पर आते थे पर ये तो समय से पहले छोड़ते ही नही थे य फिर काफी देर तक पढाते थे ! उनका विषय पढ़ाने का फिजिक्स हुआ करता था ! उन दिनों वो हमारे ग्यारहवीं और बारहवीं के सर हुआ करते थे ! दसवीं की शिक्षा पूरी करने के बाद धनभाव में मेरा दाखिला सरकारी स्कूल में हुआ फिर वही इन सर का भी न्यू कोंडली स्कूल में ट्रान्सफर हुआ था ! देखने में एकदम दबंग और बिलकुल स्वस्थ्य,गब्बर जैसे शरीर वाले व्यक्ति और आवाज ऐसी की मानो अमरीश पूरी हो ! खैर मै आपको उनकी शिक्षा का महत्व बताता हूँ जो उन्होंने प्रत्यक्ष और अपने अनुभव से सभी विद्यार्थियों और मेरे सहपाठियों को दिया ! 

उनकी सबसी अच्छी बात मुझे जो लगी वो ये थी कि उन्हें फिजिक्स का इतना ज्ञान न था , रूचि काफी थी और ऐसे ही अधिकांश टीचर का भी था पर जो बात सबसे अच्छी लगती थी वो ये कि पारंगत न होने के बावजूद भी हो किसी उस विषय के जानकार बच्चे को खड़े होकर उस विषय के बारे में पूछ पूछ कर बताते थे !! वो ये भी अहसास करा देते थे कि मै तुम्हे पढ़ाना चाहता हूँ और ये भी अहसास करा देते थे कि मुझे इस विषय का ज्ञान नही है इसीलिए मै इतनी मेहनत कर रहा हूँ तुम लोगो के साथ ! जब पढाते थे तो कभी बैठते नही थे ! एक सरकारी ग्रे कलर में उच्च गुणवत्ता वाले वस्त्र धारण करके उनकी एक अलग ही छवि बनती थी ! उन दिनों वैसे काफी सरकारी टीचर में एक अलग ही अकड़ और अहंकार हुआ करता था ! ये बात है २०१३-२०१४ की !! लेकिन जो बात उनकी अच्छी लगी और याद रखी जा सकती है वो भी ये है कि उन दिनों उनके बेटे भी पढाई कर रहे थे जो हमसे उम्र में बढ़े होंगे ! शिक्षा कौन सी कर रहे थे भगवान जाने पर उन्होंने एक दिन कक्षा में बताया कि मै अपने बच्चे के साथ तब तक जागता हूँ जब तक वो सो नही जाता ! मै कुछ भी चला लूँगा , किताब पढ़ लूँगा ,डायरी लिख लूँगा लेकिन सोता नहीं हूँ क्योंकि मुझे डर है मेरा बच्चा मुझे उल्लू न बना दे य फोन को शिक्षा की जरूरत बताकर गेम खेलना य उलटी सीधी हरकत न करना शुरू कर दे ! आवारागर्दी उनके शब्द थे वैसे !!


युवाओं के लिए प्रेरणादायक कहानी


तो किसीने पूछा कि सर आप तब तक जगे रहते हो नींद नही आती तो उन्होंने जवाब दिया ! अगर सो गया तो मेरे मरने के बाद जो मेरी नाम की शान है और जो इसने अपनी पहचान बनानी है उसका महत्व और जीवन का उद्देश्य ये समझ नही पायेगा ! मुझे ये उसे बताना है कि ये जो तुझे चीजे मिल रही है , खाना पीना और बाकि सब ये हराम की नही है , भगवान की विशेष कृपा होती है तब जाकर ये सब मिलता है और अगर हमने उसका दुरूपयोग किया तो राजा से रंक बनने में देर नही लगती बच्चो इसीलिए बच्चो पर सख्त अनुशासन और कड़ाई अनिवार्य होनी चाहिए नहीं तो बहुत दिक्कत हो जाती है !

  ये सुनने के बाद सबने खुसुर फुसुर शुरू की और सबने सर को बोला सर हमारे घर में तो पापा मम्मी कहते है सो जा बेटा , जल्दी सो जा , क्या करेगा इतना पढकर , जग कर ! और सच में कोई माता पिता नही था अपने बच्चो के साथ जगकर उसको हौसला देने के लिए य उसको नजर रखने के लिए पर केपी सर ने अगर ये बताया है तो उनकी बात इसीलिए भी सच लगती है कि हमारे क्लास के अन्य टीचर जैसे मैथ्स टीचर फ्री की फीस लेते थे बिना पढ़ाए उस तरह ये बिलकुल न थे , बेशक कोई टॉपिक समझ में न आये , बच्चे से करवाते थे , पहले खुद समझते थे फिर दूसरो को य बच्चो को समझाते थे पर कोशिश पूरी करते थे , बच्चे बोर जरुर होते थे पर उनकी यही कोशिश उनको मेरे नजर में महान बनाती है , हालांकि एक दिन उन्होंने खुद ही पढ़ाना छोड़ दिया क्योंकि उनकी गलती एक बच्चे ने निकाल दी थी फिर उस बच्चे की जमकर पिटाई भी हुयी क्योंकि उसके आगे वो नहीं बता सका !

 तो कहने का मतलब ये है दोस्तों कि बिना जहर के सांप हो तो उसे डसने की एक्टिंग तो करनी ही चाहिए ! अगर आप एक जिम्मेदार व्यक्ति है तो अपने जिम्मेदारियों के प्रति पूर्ण निष्ठावान रहना चाहिए जैसे केपी सर थे हमारे और अपने बच्चो के लिए ! वो अलग बात है उनकी शिक्षा अंक प्राप्त करने के लिए काफी नही थी पर उनकी इसी शिक्षा ने जो नैतिक ज्ञान और शिक्षा मुझे दिया है , इतने साल बाद भी उन्हें याद रखना उनके इसी स्वाभाव और व्यक्तित्व के कारण हो पाया है !! हमे भी जीवन में हिम्मत नही हारनी चाहिए ! अगर नही भी आता है तो पढ़ना चाहिए य फिर सहायता ले लेनी चाहिए जैसे सर किया करते थे ! उनके इसी कृत्य से बहुत सी शिक्षा आप ले सकते है !! उम्मीद है आपको ये सच्ची घटना पसंद आई होगी !! आप को यदि कुछ त्रुटी लगे य कहानी पसंद आये तो अपने अनुभव य विचार अवश्य प्रकट करे !! 
धन्यवाद !! 


 
पुनः फिर पधारे ! धन्यवाद 
सिंह लग्नफल



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