एक सामाजिक चिंतन – डिग्री से अधिक महत्वपूर्ण है कौशल | सामाजिक समस्या | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

वैसे तो हम सभी लोग स्कूल से ही पढ़े होते है पर कभी ये जरूरी नही समझते क़ि स्कूली पढाई क्या वास्तव में एक सटीक तरीका है बच्चो को पढाने का य अन्य कोई भी व्यवस्था है जिससे बच्चे समझदार,ज्ञानी और कौशल से सुसम्पन्न हो सकते है ! खैर कइयौ का मत अलग अलग हो सकता है पर ताजा उदाहरण और खबर ये साबित कर देती है क़ि बच्चो को पढ़ाने के पीछे मात्र चार दिवारी व छत के साधन काफी नही , उसके लिए अन्य बातें भी महत्वपूर्ण होती है जैसे बच्चों द्वारा खुद का अभ्यास , सकारात्मक सोच,एक मागर्दर्शक व नैतिक मूल्यों का उसमे होना साथ ही बच्चो के इर्द गिर्द का माहौल इतना बेहतर होना चाहिए जिससे वो पढ़ाई को सिर्फ पढ़ने के साथ साथ अभ्यास व उसको प्रयोगात्मक तौर पर सीख भी सके ! उसको साबित कर सके , जो पढ़े उसे सिर्फ रटे नही बल्कि उसकी विवेचना करे कि ये बातें जो लिखी गयी है पुस्तको में ये कितनी सच व प्रमाणिक है ! ऐसे में बच्चे लिखी गयी बातो को जबरदस्ती मानने के भावना से ग्रसित न होकर उत्साह के साथ पढेंगे !
हम ये देख पा रहे है कि तकनीकी सुविधा मिलने के बाद आने वाली पीढ़ी को पढ़ना काफी सुलभ हो गया है और आज बच्चा कहीं पर फँसता भी है तो सीधे गूगल य यूट्यूब पर वो कांसेप्ट समझ जाता है जो उसे आज स्कूल की चार दिवारी में समझ नही आ रही थी !! कुछ ऐसे भी बच्चे है जो सिर्फ इंटरनेट से ही पढ़कर काफी अच्छे अंक प्राप्त किये है न केवल अंक बल्कि उस चीज को अच्छे से समझाने की भी समझ रखते है !!
आज जो भी स्कूली शिक्षा य सरकारी नौकरी य अन्य किसी कम्पटीशन की पढाई आसानी से ऑनलाइन कोर्स के माध्यम से य ऑनलाइन लाइव सेमिनार के माध्यम से भी कराई जा सकती है जो अपने आप में तकनीक व शिक्षा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा उदाहरण है। जिसका छात्र समेत शिक्षक भी पिछले 10 वर्षो से बखूबी इस्तेमाल कर रहे है और आज इसका उपयोग कई करोड़ उपयोगकर्ता तक पहुंच गया है ! अब इन सब बातों में हम ये सीख सकते है कि शिक्षा जरूरी नही कि परम्परागत तरीको से ही आप सीख सकते है बल्कि शिक्षा व ज्ञान हर उस जगह,स्रोत से सीखी व समझी जा सकती है जो निश्छल है व सुलभ है और इंटरनेट का उपयोग भी एक ऐसा ही कारगर तरीका है ! ये कहा जा सकता है कि वर्तमान शिक्षा संस्थान कहीं न कहीं शिक्षा ,ज्ञान व संस्कार प्रदान करने के बजाय व्यापारिक लाभ व निरन्तर चलने वाले धंधे पर अधिक केन्द्रित है !!
खैर ये लेख 11 अक्टूबर रात के 2:13 am पर 2021 को लिखा जा रहा है जो मेरे दिल के एक क्षोभ का ही परिणाम है कि अब तक कोई ऐसा खास मंच य प्लेटफार्म नही बना पाया हूँ जो मेरे सपनो को साक्षात प्रकट कर सके और शिक्षा व्यवस्था का सुधार व निःशुल्क शिक्षा व समाज पर भार य बोझ न हो ऐसी शिक्षा हम दे सके जिससे भारत एक मजबूत देश के रूप में उभरे ! मेरा निजी अनुभव ये है कि इस देश में असुरक्षा व आलस्य की अधिकता है , अहंकार और आलस्य भी कुछ कम नही है साथ ही शेखी झाड़ने वाले भी कुछ कम नही है !
शिक्षा अच्छी व बेहतर मिले इसके लिए हमे भेड़ चाल से उठकर शिक्षा संस्थानों के अध्यापक के व्यक्तित्व को समझना होगा और वहां के पिछले सफल व उत्तीर्ण हुए छात्र के रिकॉर्ड जिससे आप अपने बच्चो को अच्छे स्कूल में दाखिला करवा सको ! बच्चो में नैतिक शिक्षा व माता पिता खुद ही दे जिससे बच्चो को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी जा सके !! और शिक्षा के हर स्रोत से कुछ ज्ञान अर्जित करने की क्षमता विकसित हो सके यही इस लेखनी का उद्देश्य है कि ज्ञान किसी शिक्षा संस्थान तक सीमित नही है, इसको सीमित करने की भूल कभी मत करे, कई महत्वपूर्ण विषय ऐसे है जो समाज के लिए जरूरी है पर प्रखरता व प्रमुखता से उसे स्कूल व कॉलेज में नही पढ़ाया जाता य उसकी कमी देखी गयी है !!
आपसे अनुरोध है कि छात्र जीवनकाल में बच्चो को उत्तम वातावरण , सात्विक आहार और उसके जरूरतों का ध्यान रखे क्योंकि शिक्षा में आई बाधा ऐसी ही है जैसे गर्भ में पल रहे बच्चे पर आई बाधा ! गर्भ में तो माता पिता अपने बच्चो को आंतरिक स्वस्थ भोजन पानी व जरूरी आहार से बच्चो को हष्ट पुष्ट जन्म दे सकते है पर बाहरी पोषण यानी विद्या का आहार इतना जरूरी है कि वो अगर सही न मिले तो बच्चा समाज में पर्याप्त स्थान व सम्मान नही प्राप्त कर सकता न ही समाज में उसको योग्य समझा जाता है इसीलिए जिस तरह की सावधानी बच्चे की गर्भ धारण करने से लेकर उसके संसार में आ जाने तक की जाती है उसी प्रकार परवरिश व पालने में भी उसको नैतिक मूल्यों व संस्कार से पोषित करना अनिवार्य हो जाता है !
उम्मीद है शिक्षा संस्थान य शिक्षा सम्बन्धी फैसलो में आप अपने बच्चो के लिए लापरवाही व जल्दबाजी नही करेंगे और इसी प्रण के साथ ये संकल्प लेंगे कि शिक्षा को लेकर आप अपने बच्चो के लिए एक उचित व श्रेष्ठ माहौल का निर्माण करने का भरपूर प्रयास करेंगे ताकि आपके बच्चे समाज में एक बेशकीमती रत्न समान सम्मानीय हो व अन्य को प्रेरणा भी दे सके !

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