Jab Zid Pe Aa Gayi Parvati Lyrics In Hindi | Hanuman Ansh | Sadhu Tiwari | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

Jab Zid Pe Aa Gayi Parvati Lyrics In Hindi | Hanuman Ansh | Sadhu Tiwari | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

जब ज़िद पे आ गई पार्वती भजन के संपूर्ण बोल


ओम शंभू, शिव शंभू, भोलेनाथ।

जब ज़िद पे आ गई पार्वती,
पार्वती, पार्वती।

समझाने पहुँचे सप्तऋषि,
सप्तऋषि, सप्तऋषि।

काय ज़िद कर-रही,
काय को हुमर-रही।

काय ज़िद कर-रही,
काय को हुमर-रही।

ऐसे वर के लाने,
ऐसे वर के लाने।

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप।

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप।

इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते
भोलेनाथ, भोलेनाथ।

सब कहते, भोलेनाथ।

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप।

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप।

इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते
भोलेनाथ, भोलेनाथ।

ना खपरा, ना छपरा,
ना फूस की धरे मड़ैया।

का खावे को धरो वहाँ,
बस रोवत रहत लड़ैया।

ना खपरा, ना छपरा,
ना फूस की धरे मड़ैया।

का खावे को धरो वहाँ,
बस रोवत रहत लड़ैया।

भेष धरे अवधूत फिरे,
अब तुमसे का-क्या कहे बिन्नू।

डोरा-डाँगर ले घूमे,
वे बिनकें कछुऐनैयां।

वे बिनकें कछुऐनैयां।

काय ज़िद कर-रही,
काय को हुमर-रही।

काय ज़िद कर-रही,
काय को हुमर-रही।

ऐसे वर के लाने,
ऐसे वर के लाने।

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप।

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप।

इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते
भोलेनाथ, भोलेनाथ।

सब कहते, भोलेनाथ।

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप।

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप।

इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते
भोलेनाथ, भोलेनाथ।

शंभू, शिव शंभू, भोलेनाथ।

जटा-लटा ना कबहूँ सँवारे,
दीसत महा भयंकर।

मुड़े पे आधी चंदा और,
बेला पे घूमत शंकर।

जटा-लटा ना कबहूँ सँवारे,
दीसत महा भयंकर।

मुड़े पे आधी चंदा और,
बेला पे घूमत शंकर।

राम नाम के रसिया हैं वे,
और उन्हें क्या चाहने।

कामदेव के मर्दनहारी,
घर-गृहस्थी क्या जानें।

वे घर-गृहस्थी क्या जानें।

काय ज़िद कर-रही,
काय को हुमर-रही।

काय ज़िद कर-रही,
काय को हुमर-रही।

ऐसे वर के लाने,
ऐसे वर के लाने।

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप।

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप।

इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते
भोलेनाथ, भोलेनाथ।

सब कहते, भोलेनाथ।

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप।

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप।

इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते
भोलेनाथ, भोलेनाथ।

भोले बमभोले, भोले बमभोले।
भोले बमभोले, भोले बमभोले।
भोले बमभोले, भोले बमभोले।


भजन से जुड़ी खास जानकारी

भजन का नाम: जब ज़िद पे आ गई पार्वती
गायक, संगीतकार एवं गीतकार: साधु एस. तिवारी (प्रदत्त जानकारी के अनुसार)
फ़िल्म: हनुमान अंश ( Hanuman Ansh )
संगीत लेबल: टाइम्स म्यूजिक (Times Music)

यह भजन माता पार्वती की दृढ़ तपस्या और भगवान शिव के प्रति उनकी अटूट भक्ति को दर्शाता है। इसमें सप्तऋषि माता पार्वती को भगवान शिव के वैरागी स्वरूप, उनकी सादगी और अनोखी जीवनशैली का वर्णन करके समझाने का प्रयास करते हैं।

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