एक शिक्षाप्रद कहानी - गेंद को पटकने से गेंद ऊपर ही उछलेगा !!! | Gyansagar ( ज्ञानसागर )


आज कल विद्यार्थी को दिशाहीन लोग ही दिशा प्रदान करने का ठेका ले लेते है और कुछ तो देते ही नही !! ये कहानी एक सच्चे लड़के अनुपम की है जिसने जीवन में काफी संघर्ष किया, काफी कष्ट सहे लेकिन संघर्ष और कष्ट को उसने अपने जीवन के लक्ष्य को पाने की सीड़ी की तरह इस्तेमाल किया !! बचपन से ही अनुपम बड़ा मेघावी छात्र रहा पर समय पर फीस न दे पाने,घरेलू हिंसा और अपने सहपाठियों के सताने के कारण उसके मन-मस्तिष्क पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा जिससे कम उम्र में ही वो चिंतित रहने लगा लेकिन अपने व्यक्तित्व व् अलग शक्सियत के कारण उसका सानिध्य प्राप्त करना भी उसके आस-पास के लोगों को काफी पसंद था ! माँ-बाप की ऊँची शिक्षा न होना और आर्थिक तंगी की खीज का खामियाजा अनुपम व् उसके छोटे भाई के जीवन को प्रभावित करके चुकाना पड़ा !! किराये के मकान में समय पर किराया न देने के ताने,पानी भरने के लिए झगड़ा ऐसे उतार-चढ़ाव से अनुपम का हृदय बड़ा ही व्यथित होता इसीलिए अपने गमो और दुःखो की पोटली को वो भगवान को अकेले अकेले रो रो कर बताता !! किसी तरह दंसवी तक तमाम मुश्किलों से निकलर उसने अपने कक्षा में प्रथम स्थान ग्रहण किया पर आर्थिक तंगी के कारण फिर उसे मजबूरन सरकारी स्कूल में दाखिला लेना पड़ा जिसमे काफी संघर्ष करना पड़ा ! अपने मन मुताबिक केंद्र विद्यालय स्कूल में दाखिला नही हो पाने का गम उसे हर पल सताता रहा क्योंकि भाई भतीजावाद और आरक्षण की आड़ ने उसे उस स्कूल में दाखिला होने से वंचित कर दिया ! सरकारी स्कूल में पहुँचने के बाद वहां के हालात से उसे ऐसा लगा जैसे वो ही पीड़ित य मजबूर नही है ! और भी लोग है जिन्हें ढंग के कपड़े नसीब नही होते तो किसी को चप्पल य स्कूल बैग ! इस बात से उसे पढ़ने और जीवन जीने की थोड़ी हिम्मत मिली ! लड़कियों को पैदल जाते हुए देखा तो और भी हिम्मत मिलती सोचता कि ये जब इतना कष्ट सहकर अपने घर से स्कूल जा सकती है तो मै क्यों नही !! अनुपम में यही बात थी जो उसे और बेहतर बनाती !! लोगों की अच्छाई को तुरंत अपनाता पर अवगुणों को हमेशा दूर रखता !! किसी तरह बारवीं बड़ी मेहनत से उत्तीर्ण हुआ पर ट्युशन ढंग से न मिल पाने के कारण अपने योग्यता अनुसार उच्च अंक से उत्तीर्ण नही हो पाया ! खैर अपने गणित विषय पर अधिक जोर देने के कारण काफी मेहनत से उसने सरकारी कॉलेज को भी निकाल लिया पर यहाँ भी कॉलेज के मनमानी,आरक्षण की मार और आल्लोटमेंट के घोटाले से मजबूरन उसको प्राइवेट कॉलेज लेना पड़ा !! अब तक उसके जीवन में इतने तमाम परेशानी आ चुकी थी जिससे उसका मन पढ़ाई छोड़कर व्यवस्था को बदलने और ऐसे भ्रष्ट शासन व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए उतारू हो चूका था !! और कोई होता तो शायद पागल हो जाता य आत्मा हत्या कर चूका होता पर कम उम्र में इतनी मार लग चुकी थी कि अब कोई भय नही होता ! उसने साल २०१५ से लेकर अब तक हर पल समाज का भला चाहा और सामर्थ्य योग्यता अनुसार हर पल अपने आस-पास के लोगो की भलाई और मदद करना ही चाहा पर कुछ लोगो को उसका जीवन दुर्भाग्यपूर्ण का उदाहरण लगने लग गया है !! उसके बी-टेक के ड्राप को चर्चा का विषय बनाकर उसपे मजाक बनाया जाने लगा !! २ साल पढने के बाद पैसे बर्बाद कर दिए ये दुहाई दी जा रही है !! उसके जीवन में उसके साथ क्या हुआ ! कैसे जिया ! क्या खाया ? क्या पिया ?? कब हंसा ? कब रोया ?? इससे कोई मतलब नही उन्हें लेकिन उसके सफल य विफल होने का ठप्पा उन्होंने अभी से लगा लिया !!! ये वो लोग है जिन्हें रिश्तेदार कहा जाता है ! जिन्हें उसके सुख दुःख से कोई मतलब नही लेकिन व्यंग्य कसने में कोई कसर नही छोड़ी गयी !!!
अनुपम का बी-टेक ड्राप करना उसकी मर्जी भी थी और मजबूरी भी !! शिक्षा व्यवस्था के नाम पर लूट मार जो हो रही थी उसे वो सहा नही गया ! एक लाख की पढ़ाई और पढ़ाई का स्रोत जब इन्टरनेट हो तो सवाल यही उठता है कि शिक्षक की क्या जरूरत जब बच्चा समझदार हो तो !! खैर धन के लूट के साथ संस्कार का नाश भी बराबर होता !!
खैर अंत में यही कहूँगा जिसने खुद कोई मुकाम हासिल नही किया वो अनुपम के सफल य विफल होने का निर्णय न ही करे तो बेहतर है क्योंकि उसके जीवन में रूकावटे जरुर आती रही है जो कि उसके जीवन में एक गुरु की भांति मार्गदर्शक साबित अब तक रहा है !! पेड़ का बीज लगाने से फल तुरंत नही लगते !! समय लगता है प्रतीक्षा करे लेकिन हाँ याद रखे जिस पेड़ पर आपने मजाक बनाये है उसको बेइज्जत किया है उसकी छाया,पत्ते,जड़,फल,फूल कुछ नसीब नही होगा क्योंकि धैर्य अब नही रहा अनुपम में ! बहुत धैर्य की बत्ती जला ली !! अपने जीवन में कौन सा ऐसा महान कार्य किया जिससे समाज आपको जाने,समाज आपको माने ! समाज आपका नाम श्रद्धा से ले पर अनुपम ने अपने निस्वार्थ सेवा से वो सब कमाया है जो किसी धन दौलत से नही खरीदा जा सकता !! उसने प्यार पाया है ! उसने विश्वास पाया है ! उसने सत्संगी मित्रो का साथ पाया है ! बड़े प्यारे भाइयो-बहनों का आशीष पाया है !! और ये सब पाने के बाद अनुपम खुद अपने सफल होने की गारंटी खुद लेता है !! और सबसे बड़ी बात उसके साथ ईश्वर का हाथ भी है और जिसके साथ ईश्वर का हाथ हो उसे फिर किसी बात की चिंता करने की जरूरत नही !!
अंत में यही कहूँगा कि पटकने से मै गिरूंगा नही बल्कि ऊँचा ही उठूँगा !!

1 Comments

  1. बधाओ को सम्मान देकर संघर्ष करना है हमे,
    शत्रुओ को मित्रता का ताज देना है हमे,
    जीवन समस्या का डगर है गर लौट आए तो श्राप है,
    बढ़ युवा तू नेक रास्ते पर अभी कुछ काम है

    ✍प्रशांत की कलम से

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