🌞दैनिक पंचांग🌞
🌥️दिनांक - 15 फरवरी 2026
🌥️दिन - रविवार
🌥️विक्रम संवत् - 2082
🌥️संवत्सर - विश्वावसु
🌥️अयन - उत्तरायण
🌥️ऋतु - शिशिर
🌥️मास - फाल्गुन
🌥️पक्ष - कृष्ण
🌥️सूर्य राशि - कुम्भ
🌥️चंद्र राशि - मकर
🌥️सूर्योदय - 06:51
🌥️सूर्यास्त - 06:15 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️तिथि - त्रयोदशी सायं 05:04 तक तद्पश्चात चतुर्दशी
🌥️नक्षत्र - उत्तराषाढ़ा सायं 07:48 तक तद्पश्चात श्रवण
🌥️योग - व्यतीपात रात्रि 02:47 फरवरी 16 तक तद्पश्चात वरीयान्
🌥️राहुकाल - दिन 04:50 से दिन 06:15 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️ भद्रावास - पाताल सायं 05:04 से प्रातः 05:23 फरवरी 16 तक
🌥️ सर्वार्थसिद्धि योग - प्रातः 06:51 से सायं 07:48 तक
🌥️दिशा शूल 👉🏻 पश्चिम दिशा में
🌥️अग्निवास: 👉🏻 पाताल - अशुभ सायं 05:04 तक तद्पश्चात पृथ्वी - शुभ
🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 दक्षिण
🌥️शिववास: 👉🏻 भोजन में - पीणा दिन 05:04 तक तद्पश्चात श्मशान में - मृत्युकारक
🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:10 से प्रातः 06:01 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 12:11 से दिन 12:56 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:08 फरवरी 16 से रात्रि 12:58 फरवरी 16 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
⛅व्रत, पर्व आदि विवरण - भद्रा, सर्वार्थसिद्धि योग, महाशिवरात्रि, मासिक शिवरात्रि, वैद्यनाथ जयंती, एकलव्य दिवस
🔻पद, चरण🔻
(नामकरण हेतु नामाक्षर सूचक)
2 भो →उत्तराषाढा 07:06 AM तक
3 जा →उत्तराषाढा 01:28 PM तक
4 जी →उत्तराषाढा 07:48 PM तक
1 खी →श्रवण 02:06 AM फरवरी 16 तक
🔶चोघडिया, दिन🔶
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)
उद्वेग 07:01 से 08:26 तक अशुभ
चर 08:26 से 09:51 तक शुभ
लाभ 09:51 से 11:16 तक शुभ
अमृत 11:16 से 12:41 तक शुभ
काल 12:41 से 14:06 तक अशुभ
शुभ 14:06 से 15:31 तक शुभ
रोग 15:31 से 16:57 तक अशुभ
उद्वेग 16:57 से 18:22 तक अशुभ
🔶चोघडिया, रात🔶
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)
शुभ 18:22 से 19:56 तक शुभ
अमृत 19:56 से 21:31 तक शुभ
चर 21:31 से 23:06 तक शुभ
रोग 23:06 से 24:41 तक अशुभ
काल 24:41 से 26:16 तक अशुभ
लाभ 26:16 से 27:50 तक शुभ
उद्वेग 27:50 से 29:25 तक अशुभ
शुभ 29:25 से 31:00 तक शुभ
🌥️विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। एवं चतुर्दशी के दिन स्त्री - सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
पञ्चाङ्ग निर्माता पं. श्री दीपेश शास्त्री जी
वेद, पुराण एवं शास्त्रोक्त किसी भी प्रकार की समस्या के निदान हेतु अथवा परामर्श हेतु सम्पर्क करें।

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