Aaj Ka Panchang | Aaj Ki Tithi | आज का पंचांग | आज की तिथि | 16th March 2026

Aaj Ka Panchang | Aaj Ki Tithi | आज का पंचांग | आज की तिथि | 16th March 2026


🌞दैनिक पंचांग🌞

 🌥️दिनांक - 16 मार्च 2026
🌥️दिन - सोमवार
🌥️विक्रम संवत् - 2082
🌥️संवत्सर - विश्वावसु
🌥️अयन - उत्तरायण
🌥️ऋतु - बसंत
🌥️मास - चैत्र
🌥️पक्ष - कृष्ण
🌥️सूर्य राशि - मीन
🌥️चंद्र राशि - मकर सायं 06:14 तक तद्पश्चात कुम्भ
🌥️सूर्योदय - 06:27
🌥️सूर्यास्त - 06:29 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️तिथि - द्वादशी सुबह 09:40 तक तद्पश्चात त्रयोदशी
🌥️नक्षत्र - धनिष्ठा प्रातः 06:22 मार्च 17 तक तद्पश्चात शतभिषा
🌥️योग - शिव सुबह 09:37 तक तद्पश्चात सिद्ध
🌥️राहुकाल - सुबह 07:57 से सुबह 09:28 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️ पंचक 👉🏻 सायं 06:14 से रात्रि 02:27 मार्च 21 तक
🌥️दिशा शूल 👉🏻 पूर्व दिशा में
🌥️अग्निवास: 👉🏻 पाताल - अशुभ सुबह 09:40 तक तद्पश्चात पृथ्वी - शुभ
🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 दक्षिण
🌥️शिववास: 👉🏻 नंदी पर - अभीष्ट सिद्धि सुबह 09:40 तक तद्पश्चात भोजन में - पीणा
🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:51 से प्रातः 05:39 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 12:04 से दिन 12:52 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:03 मार्च 17 से रात्रि 12:51 मार्च 17 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)

⛅व्रत, पर्व आदि विवरण - पापमोचनी एकादशी पारण, पंचक, प्रदोष व्रत, 

🔻पद, चरण🔻 
(नामकरण हेतु नामाक्षर सूचक)

1 गा→धनिष्ठा 12:06 PM तक
2 गी→धनिष्ठा 06:14 PM तक
3 गु→ धनिष्ठा 12:19 AM तक
4 गे→ धनिष्ठा 06:22 AM मार्च 17 तक

🔶चोघडिया, दिन🔶 
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)

अमृत 06:36 से 08:06 तक शुभ
काल 08:06 से 09:36 तक अशुभ
शुभ 09:36 से 11:06 तक शुभ
रोग 11:06 से 12:36 तक अशुभ
उद्वेग 12:36 से 14:06 तक अशुभ
चर 14:06 से 15:35 तक शुभ
लाभ 15:35 से 17:05 तक शुभ
अमृत 17:05 से 18:35 तक शुभ

🔶चोघडिया, रात🔶 
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)

चर 18:35 से 20:05 तक शुभ
रोग 20:05 से 21:35 तक अशुभ
काल 21:35 से 23:05 तक अशुभ
लाभ 23:05 से 24:35 तक शुभ
उद्वेग 24:35 से 26:05 तक अशुभ
शुभ 26:05 से 27:35 तक शुभ
अमृत 27:35 से 29:05 तक शुभ
चर 29:05 से 30:35 तक शुभ

🌥️विशेष - द्वादशी को पुतिका (पोई) खाने से एवं त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)

पञ्चाङ्ग निर्माता पं. श्री दीपेश शास्त्री जी

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