🌞दैनिक पंचांग🌞
🌞दैनिक पंचांग🌞
🌥️दिनांक - 22 मार्च 2026
🌥️दिन - रविवार
🌥️विक्रम संवत् - 2083
🌥️संवत्सर - विश्वावसु
🌥️अयन - उत्तरायण
🌥️ऋतु - बसंत
🌥️मास - चैत्र
🌥️पक्ष - शुक्ल
🌥️सूर्य राशि - मीन
🌥️चंद्र राशि - मेष रात्रि 04:14 तक तद्पश्चात वृषभ
🌥️सूर्योदय - 06:21
🌥️सूर्यास्त - 06:31 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️तिथि - चतुर्थी रात्रि 09:16 तक तद्पश्चात पंचमी (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️नक्षत्र - भरणी रात्रि 10:42 तक तद्पश्चात कृत्तिका (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️योग - वैधृति दोपहर 03:41 तक तद्पश्चात विष्कुम्भ (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️करण - वणिज सुबह 10:36 तक, विष्टि रात्रि 09:16 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️राहुकाल - शाम 05:00 से 06:31 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️ भद्रावास 👉🏻स्वर्ग में- दिन 10:36 रात्रि 09:16 तक
🌥️दिशा शूल 👉🏻 पश्चिम दिशा में
🌥️अग्निवास: 👉🏻 पाताल - अशुभ
🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 पूर्व
🌥️शिववास: 👉🏻 क्रीड़ा में - सन्ततिकष्ट रात्रि 09:16 तक तद्पश्चात कैलाश पर - सौख्य
🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:47 से प्रातः 05:34 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 12:02 से दिन 12:50 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:02 मार्च 23 से रात्रि 12:49 मार्च 23 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
⛅व्रत, पर्व आदि विवरण - भद्रा, रवि योग, विनायक चतुर्थी, ज्वालामुखी योग (रात्रि 09:16 से रात्रि 10:42 तक)
🔻पद, चरण🔻
(नामकरण हेतु नामाक्षर सूचक)
2 लू→भरणी 11:40 AM तक
3 ले→भरणी 05:11 PM तक
4 लो→भरणी 10:42 PM तक
1 अ→कृत्तिका 04:14 AM मार्च 23 तक
🔶चोघडिया, दिन🔶
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)
उद्बेग 06:21 AM - 07:53 AM अशुभ
चर 07:53 AM - 09:24 AM शुभ
लाभ 09:24 AM - 10:55 AM शुभ
अमृत 10:55 AM - 12:26 PM शुभ
काल 12:26 PM - 01:57 PM अशुभ
शुभ 01:57 PM - 03:28 PM शुभ
रोग 03:28 PM - 05:00 PM अशुभ
उद्बेग 05:00 PM - 06:31 PM अशुभ
🔶चोघडिया, रात🔶
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)
शुभ 06:31 PM - 07:59 PM शुभ
अमृत 07:59 PM - 09:28 PM शुभ
चर 09:28 PM - 10:57 PM शुभ
रोग 10:57 PM - 00:26 AM अशुभ
काल 00:26 AM - 01:54 AM अशुभ
लाभ 01:54 AM - 03:23 AM शुभ
उद्बेग 03:23 AM - 04:52 AM अशुभ
शुभ 04:52 AM - 06:20 AM शुभ
🌥️विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
पञ्चाङ्ग निर्माता पं. श्री दीपेश शास्त्री जी
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