🌞दैनिक पंचांग🌞
🌥️ दिनांक - 17 अप्रैल 2026
🌥️ दिन - शुक्रवार
🌥️ विक्रम संवत् - 2083
🌥️ संवत्सर - विश्वावसु
🌥️ अयन - उत्तरायण
🌥️ ऋतु - बसंत
🌥️ मास - वैशाख
🌥️ पक्ष - कृष्ण
🌥️ सूर्य राशि - मेष
🌥️ चंद्र राशि - मीन दिन 12:02 तक तद्पश्चात मेष
🌥️ सूर्योदय - 05:57
🌥️ सूर्यास्त - 06:40 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️तिथि - अमावस्या सायं 05:21 तक तद्पश्चात प्रतिपदा
🌥️नक्षत्र - रेवती दिन 12:02 तक तद्पश्चात अश्विनी
🌥️योग - वैधृति प्रातः 07:22 तक तद्पश्चात विष्कम्भ रात्रि 03:45 अप्रैल 18 तक प्रीति
🌥️राहुकाल - दिन 10:43 से दिन 12:19 तक
🌥️पंचक 👉🏻 दोपहर 12:02 तक
🌥️गण्ड मूल 👉🏻 (दिन-रात्रि) 18 अप्रैल दिन शनिवार के सुबह 09:42 तक
🌥️सर्वार्थसिद्धि योग👉🏻 प्रातः 05:57 से अप्रैल 18 के प्रातः 05:57 तक
🌥️अमृतसिद्धि योग👉🏻 प्रातः 05:57 से दोपहर 12:02 तक
🌥️दिशा शूल 👉🏻 पश्चिम दिशा में
🌥️अग्निवास: 👉🏻 आकाश- अशुभ सायं 05:21 तक तद्पश्चात पृथ्वी - शुभ
🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 उत्तर, पूर्व
🌥️शिववास: 👉🏻 गौरी के साथ - शुभ सायं 05:21 तक तद्पश्चात श्मशान में - मृत्युकारक
🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:27 से प्रातः 05:12 तक
🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:53 से दिन 12:44 तक
🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:56 से रात्रि 12:41 अप्रैल 18 तक
⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- पंचक, गण्ड मूल, सर्वार्थसिद्धि योग, अमृतसिद्धि योग, दर्श अमावस्या, वैशाख अमावस्या
🔻पद, चरण🔻
(नामकरण हेतु नामाक्षर सूचक)
3 च→ रेवती 06:34 AM तक
4 ची→ रेवती 12:02 PM तक
1 चु→ अश्विनी 05:29 PM तक
2 चे→ अश्विनी 10:54 PM तक
3 चो→ अश्विनी 04:19 AM अप्रैल 18 तक
🔶 चोघड़िया, दिन 🔶
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)
चर 05:57 से 07:33 तक शुभ
लाभ 07:33 से 09:08 तक शुभ
अमृत 09:08 से 10:43 तक शुभ
काल 10:43 से 12:19 तक अशुभ
शुभ 12:19 से 13:54 तक शुभ
रोग 13:54 से 15:30 तक अशुभ
उद्वेग 15:30 से 17:05 तक अशुभ
चर 17:05 से 18:40 तक शुभ
🔶 चोघड़िया, रात 🔶
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)
रोग 18:40 से 20:05 तक अशुभ
काल 20:05 से 21:29 तक अशुभ
लाभ 21:29 से 22:54 तक शुभ
उद्वेग 22:54 से 24:18 तक अशुभ
शुभ 24:18 से 25:43 तक शुभ
अमृत 25:43 से 27:07 तक शुभ
चर 27:07 से 28:32 तक शुभ
रोग 28:32 से 29:57 तक अशुभ
🌥️विशेष - आमवस्या के दिन स्त्री - सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
पञ्चाङ्ग निर्माता पं. श्री दीपेश शास्त्री जी
वेद, पुराण एवं शास्त्रोक्त किसी भी प्रकार की समस्या के निदान हेतु अथवा परामर्श हेतु सम्पर्क करें।

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