Aaj Ka Panchang | Aaj Ki Tithi | आज का पंचांग | आज की तिथि | 31st May 2026

Aaj Ka Panchang | Aaj Ki Tithi | आज का पंचांग | आज की तिथि | 31st May 2026


🌞दैनिक पंचांग🌞

🌥️ दिनांक - 31 मई 2026
🌥️ दिन - रविवार
🌥️ विक्रम संवत् - 2083
🌥️ संवत्सर - विश्वावसु
🌥️ अयन - उत्तरायण
🌥️ ऋतु - ग्रीष्म
🌥️ मास - ज्येष्ठ (अधिक मास)
🌥️ पक्ष - शुक्ल
🌥️ सूर्य राशि - वृषभ
🌥️ चंद्र राशि - वृश्चिक
🌥️ सूर्योदय - 05:34
🌥️ सूर्यास्त - 07:00
(समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️तिथि - पूर्णिमा दिन 02:14 तक तद्पश्चात प्रतिपदा
🌥️नक्षत्र - अनुराधा दिन 04:12 तक तद्पश्चात ज्येष्ठा
🌥️योग - सिध्द प्रातः 06:19 जून 01 तक तद्पश्चात साध्य
🌥️राहुकाल - सायं 05:19 से सायं 07:00 तक
🌥️गण्ड मूल 👉🏻 सायं 04:12 से रात्रि 10:06 जून 02 तक
🌥️दिशा शूल 👉🏻 पश्चिम दिशा में
🌥️अग्निवास: 👉🏻 आकाश/पाताल - अशुभ
🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 उत्तर
🌥️शिववास: 👉🏻  श्मशान में - मृत्युकारक दिन 02:14 तक तद्पश्चात गौरी के साथ - शुभ
🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:09 से प्रातः 04:52 तक
🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:50 से दिन 12:44 तक
🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:56 से रात्रि 12:38 जून 01 तक
⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- गण्ड मूल, स्नान.दा.पूर्णिमा, व्यापार प्रारम्भ मुहूर्त

🔻पद, चरण🔻
(नामकरण हेतु नामाक्षर सूचक)

3 नू→ अनुराधा 09:28 AM तक
4 ने→ अनुराधा 16:12 PM तक
1 नो→ ज्येष्ठा 22:55 PM तक
2 या→ ज्येष्ठा 29:39 AM जून 01 तक

🔶 चौघड़िया, दिन 🔶  
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)

उद्वेग 05:34 से 07:15 तक अशुभ  
चर 07:15 से 08:55 तक सामान्य  
लाभ 08:55 से 10:36 तक उन्नति  
अमृत 10:36 से 12:17 तक सर्वोत्तम  
काल 12:17 से 01:58 तक हानि  
शुभ 01:58 से 03:38 तक उत्तम  
रोग 03:38 से 05:19 तक अमंगल  
उद्वेग 05:19 से 07:00 तक अशुभ  

🔶 चौघड़िया, रात 🔶  
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)

शुभ 07:00 से 08:19 तक उत्तम  
अमृत 08:19 से 09:38 तक सर्वोत्तम  
चर 09:38 से 10:58 तक सामान्य  
रोग 10:58 से 12:17 तक अमंगल  
काल 12:17 से 01:36 तक हानि  
लाभ 01:36 से 02:55 तक उन्नति  
उद्वेग 02:55 से 04:15 तक अशुभ  
शुभ 04:15 से 05:34 तक उत्तम  

🌥️विशेष - पूर्णिमा के दिन स्त्री - सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है एवं प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाएं क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)

पञ्चाङ्ग निर्माता पं. श्री दीपेश शास्त्री जी

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