अक्सर सोशल मीडिया पर एक पंक्ति देखने को मिलती है -
"Life is Difficult, But Never Forget - हनुमन्त सदा सहायते।"
यह पंक्ति सुनने और पढ़ने में अत्यंत प्रेरणादायक लगती है। लेकिन मेरे विचार से इसका अर्थ केवल इतना नहीं है कि जीवन में कठिनाई आए और हम हनुमान जी का स्मरण करें तो वे तत्काल हमारी सहायता के लिए उपस्थित हो जाएँ।
मेरी समझ, अनुभव और श्रद्धा के अनुसार "सदा सहायते" तभी संभव है जब व्यक्ति सागरस्वयं भी उस सहायता के योग्य बनने का प्रयास करे। जब उसके भीतर श्रद्धा हो, भक्ति हो, सदाचार हो और वह अपने जीवन को धर्म, मर्यादा और सत्य के अनुरूप जीने का प्रयास करता हो।
हनुमान जी केवल शक्ति के प्रतीक नहीं हैं, वे सेवा, समर्पण, विनम्रता और धर्मनिष्ठा के भी प्रतीक हैं। इसलिए उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए केवल उनका नाम लेना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन आदर्शों को भी जीवन में उतारना आवश्यक है जिनकी सेवा में उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
यदि हम अपने कर्मों में अधर्म, छल, अन्याय और स्वार्थ को स्थान दें और फिर केवल संकट आने पर ईश्वर से सहायता की अपेक्षा करें, तो यह आध्यात्मिक दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। ईश्वर सहायता अवश्य करते हैं, लेकिन वे हमें हमारे कर्मों का बोध भी कराते हैं।
क्या वास्तव में जीवन कठिन है?
अब प्रश्न आता है कि जीवन कठिन है या नहीं?
इसका उत्तर प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है।
एक व्यक्ति फुटपाथ पर जीवन व्यतीत करता है। उसके पास पर्याप्त भोजन नहीं है, रहने के लिए घर नहीं है, पहनने के लिए अच्छे वस्त्र नहीं हैं। सामान्य दृष्टि से देखने पर हम उसे अत्यंत दुखी और अभावग्रस्त मान लेते हैं।
लेकिन क्या हमने उसका सम्पूर्ण जीवन देखा है?
क्या हमने उसके भीतर छिपे साहस, संघर्ष और आत्मबल को देखा है?
संभव है वही बालक, जिसने बचपन से लोगों के बीच रहकर संघर्ष करना सीखा हो, भविष्य में एक महान लेखक, संत, अधिकारी, व्यवसायी या समाज सुधारक बन जाए। संभव है उसकी वर्तमान कठिनाइयाँ ही उसके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी शक्ति बन रही हों।
कई बार जिन परिस्थितियों को हम दुर्भाग्य समझते हैं, वही परिस्थितियाँ किसी व्यक्ति को असाधारण बना देती हैं।
हम लोगों को अधूरा देखकर निर्णय कर लेते हैं
मनुष्य की एक बड़ी भूल यह है कि वह किसी व्यक्ति को उसके जीवन के केवल एक छोटे से क्षण में देखकर उसका सम्पूर्ण मूल्यांकन कर देता है।
हम किसी का वर्तमान देखते हैं, लेकिन उसका अतीत नहीं जानते।
हम उसकी आज की स्थिति देखते हैं, लेकिन उसका भविष्य नहीं जानते।
इसलिए किसी को भी उसकी वर्तमान परिस्थिति के आधार पर छोटा, असफल या अयोग्य समझ लेना उचित नहीं है।
आज जो व्यक्ति संघर्ष कर रहा है, वही कल प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
और आज जो व्यक्ति सफलता के शिखर पर दिखाई दे रहा है, उसके भीतर कितने संघर्ष चल रहे हैं, यह भी संभव है हम न जानते हों।
जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है
जीवन का एक सार्वभौमिक सत्य है -
कुछ भी स्थायी नहीं है।
- न सुख स्थायी है।
- न दुःख स्थायी है।
- न सफलता स्थायी है।
- न असफलता स्थायी है।
जैसे दिन के बाद रात आती है और रात के बाद पुनः सवेरा होता है, वैसे ही जीवन में भी परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं।
इसलिए कठिन समय आने पर निराश नहीं होना चाहिए और अच्छे समय में अहंकार नहीं करना चाहिए।
कई बार समस्या जीवन में नहीं, दृष्टिकोण में होती है
कई बार व्यक्ति सोचता है कि उसका जीवन बहुत खराब है, लेकिन वास्तव में उसकी समस्या जीवन नहीं बल्कि उसका दृष्टिकोण होता है।
और कई बार व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को बहुत अच्छा समझ रहा होता है, जबकि वास्तविकता उससे भिन्न होती है।
इसीलिए जीवन में समय-समय पर अच्छे लोगों का मार्गदर्शन आवश्यक है।
एक सच्चा मित्र, एक गुरु, एक संत, एक विचारक या एक अनुभवी व्यक्ति कई बार हमें हमारी ही स्थिति का सही प्रतिबिंब दिखा देता है।
और तब हमें समझ आता है कि हमारा सोचना कितना सही था और कितना गलत।
जब मन परेशान हो तो क्या करें?
जब मन भारी हो, दुखी हो या जीवन निरर्थक प्रतीत होने लगे, तब स्वयं को अकेला मत समझिए।
- किसी अच्छे मित्र से बात कीजिए।
- किसी संत या गुरु का मार्गदर्शन लीजिए।
- किसी भजन, सत्संग या आध्यात्मिक वातावरण में कुछ समय बिताइए।
- प्रकृति के बीच जाइए।
- किसी नदी, तालाब, पर्वत, समुद्र या वृक्ष के नीचे बैठकर अपने मन की बात ईश्वर से कहिए।
क्योंकि परमात्मा केवल मंदिरों में ही नहीं, वे प्रत्येक कण में उपस्थित हैं।
वे साकार भी हैं और निराकार भी।
वे दूर भी हैं और हमारे भीतर भी।
अंत में
यदि इस समय आपके जीवन में कठिनाइयाँ हैं, तो यह बात याद रखिए —
जीवन का कोई भी दुःख स्थायी नहीं होता।
उसका अंत निश्चित है।
आप केवल अपने कर्म करते रहिए, अपने प्रयास जारी रखिए और अपने भीतर विश्वास बनाए रखिए।
क्योंकि सबसे अंधेरी रात के बाद भी सवेरा अवश्य होता है।
और जब समय बदलता है, तो कभी-कभी वही व्यक्ति सबसे अधिक चमकता है जिसे संसार ने सबसे अधिक कमजोर समझा था।
"दृष्टिकोण बदलिए, परिस्थिति का अर्थ बदल जाएगा।"
- सरांश सागर

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