नमस्कार प्रिय पाठकों,
सबसे पहले आप सभी का हृदय से धन्यवाद, जिन्होंने वर्षों से इस वेबसाइट पर आकर हमारे लेखों को पढ़ा, सराहा और अपने जीवन का अमूल्य समय हमें दिया। आपके स्नेह, विश्वास और शुभकामनाओं ने ही इस मंच को आज तक जीवित रखा है।
कई बार कुछ पाठक अपने सुझाव, विचार या योगदान साझा करना चाहते हैं, लेकिन तकनीकी सीमाओं अथवा पर्याप्त संवाद माध्यमों के अभाव में ऐसा नहीं कर पाते। मैं आपकी इस भावना को समझता हूँ और इसके लिए आपका आभारी हूँ।
बहुत कम लोग जानते हैं कि इस विचार की शुरुआत वर्ष 2014 में एक छोटे से व्हाट्सऐप समूह से हुई थी। उस समय व्हाट्सऐप पर न स्टेटस की सुविधा थी और न ही बड़े समूह बनाने की। केवल 25 से 50 लोगों को जोड़ने की सीमा हुआ करती थी। उस छोटे से समूह में मेरे कुछ मित्र और परिवार के सदस्य जुड़े थे।
वर्ष 2015 में इस प्रयास को फेसबुक समूह के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। मेरे पिताजी और छोटे भाई ने भी अपने मित्रों और परिचितों को जोड़कर इस विचार को विस्तार देने में सहयोग किया। विशेष रूप से 2015 और 2016 का समय अत्यंत सक्रिय और प्रेरणादायक रहा।
फिर जीवन की व्यस्तताएँ बढ़ीं। कॉलेज में प्रवेश, करियर की जिम्मेदारियाँ और व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण मैं इस कार्य को उतना समय नहीं दे पाया जितना देना चाहता था। इसी दौरान मैंने एक महत्वपूर्ण बात अनुभव की—समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने, लोगों को प्रेरित करने और किसी भी बड़े उद्देश्य को सफल बनाने के लिए केवल भावनाएँ ही नहीं, बल्कि समय, संसाधन और आर्थिक शक्ति भी आवश्यक होती है।
समय के साथ मेरा धर्म, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति के प्रति प्रेम कभी कम नहीं हुआ। बल्कि जितना समय मिला, उतना सीखने और समझने का प्रयास करता रहा। कुछ समय पहले मेरे मन में विचार आया कि वेबसाइट पर नियमित रूप से पंचांग, चालीसा, ज्योतिषीय विवरण और शास्त्र आधारित सामग्री प्रकाशित की जाए।
इस उद्देश्य से अनेक विद्वान ब्राह्मण, कर्मकाण्ड विशेषज्ञ, ज्योतिषाचार्य, पुजारी और धार्मिक वक्ता हमारे साथ जुड़े भी। किन्तु हम सभी के समय का समन्वय बन पाना कठिन हो गया। तब मैंने स्वयं से एक प्रश्न पूछा—
क्या वास्तव में हमें वही कार्य दोहराना चाहिए जो पहले से हजारों वेबसाइटों, पुस्तकों और डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध है?
आज के युग में श्रद्धालुजन पंचांग, चालीसा या ज्योतिषीय जानकारी कुछ ही क्षणों में अनेक स्रोतों से प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे में उन विद्वानों का मूल्यवान समय केवल सामग्री लिखने में लगाना और फिर उसे प्रकाशित करने की प्रक्रिया में समय व्यतीत करना मुझे उचित नहीं लगा।
इसलिए हमने एक सरल निर्णय लिया।
जो विद्वान अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, जो अपने चैनलों, आश्रमों, संस्थाओं या सोशल मीडिया मंचों पर सक्रिय हैं, उनके लिंक और परिचय को हम अपनी वेबसाइट पर स्थान देंगे ताकि इच्छुक पाठक सीधे उन्हीं तक पहुँच सकें।
मैं स्वयं न तो पूर्ण ब्राह्मण हूँ, न कोई सिद्ध पुरुष, न ही किसी विशेष विद्या का आचार्य। मैं केवल एक जिज्ञासु व्यक्ति हूँ जिसे धर्म, अध्यात्म, संस्कृति और समाज के प्रति स्वाभाविक प्रेम है।
मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि मेरा कार्य स्वयं माला बनना नहीं, बल्कि उस माला को जोड़ने वाला धागा बनना है। समाज में जो संत, साधु, विद्वान, लेखक, चिंतक और कर्मयोगी लोग अच्छा कार्य कर रहे हैं, मैं उनके प्रयासों को जोड़ने और लोगों तक पहुँचाने का माध्यम बनना चाहता हूँ।
यह भी संभव है कि संसार में अनेक ऐसे महान संत, तपस्वी और विद्वान हों जिनसे मेरा अभी तक परिचय न हुआ हो। जैसे-जैसे अवसर मिलेगा, हम उनके बारे में भी लेख प्रकाशित करेंगे, उनसे संवाद करेंगे और उनके विचारों को समाज तक पहुँचाने का प्रयास करेंगे।
मैं आप सभी पाठकों से भी अनुरोध करता हूँ कि यदि आप इस प्रयास को सार्थक मानते हैं तो अपने सुझाव अवश्य दें। आप किस प्रकार के लेख पढ़ना चाहते हैं? किन विषयों पर चर्चा चाहते हैं? किन लेखकों, कवियों, विचारकों और समाजसेवियों को इस मंच पर देखना चाहते हैं?
आपके सुझाव हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
एक और बात स्पष्ट करना चाहता हूँ। यदि कोई शास्त्र, धर्म, ज्योतिष, कर्मकाण्ड अथवा किसी विशेष आध्यात्मिक विषय से जुड़ी सामग्री प्रकाशित होती है, तो उसकी प्रामाणिकता और उत्तरदायित्व उसी विषय के योग्य विद्वानों के पास होना चाहिए। जिस विषय का मुझे पर्याप्त ज्ञान नहीं है, उसके बारे में अंतिम निर्णय या स्पष्टीकरण देने का अधिकार भी मैं स्वयं को नहीं देता।
ज्ञानसागर आज तक किसी बाहरी चंदे, आर्थिक सहायता या प्रायोजन के बिना चलता आया है। इसका कारण यह है कि यह मेरे लिए कोई सामाजिक परियोजना नहीं, बल्कि मेरे स्वभाव, संस्कार और आंतरिक रुचि का हिस्सा है। यह मेरे लिए सेवा से अधिक एक स्वाभाविक अभिव्यक्ति है।
यदि भविष्य में कोई ऐसा सामाजिक उद्देश्य सामने आता है जिसमें सामूहिक सहभागिता की आवश्यकता होगी, तो ईश्वर की इच्छा और आप सभी के सहयोग से हम उस दिशा में भी अवश्य आगे बढ़ेंगे।
वर्तमान में मेरा प्रयास केवल इतना है कि अपनी क्षमता और उपलब्ध समय के अनुसार नियमित रूप से उपयोगी, प्रेरणादायक और सामाजिक चेतना से जुड़े लेख आपके समक्ष प्रस्तुत करता रहूँ।
मेरे निजी जीवन में भी कुछ संघर्ष, उतार-चढ़ाव और परिस्थितियाँ रही हैं, जिनके कारण मैं हमेशा उतना समय नहीं दे पाया जितना देना चाहता था। फिर भी विश्वास है कि यदि ईश्वर की कृपा बनी रही, तो ज्ञानसागर आगे भी निरंतर विकसित होगा और हम सभी मिलकर इसके माध्यम से समाज के लिए कुछ सार्थक योगदान दे सकेंगे।
आपके प्रेम, विश्वास और शुभकामनाओं के लिए पुनः हृदय से धन्यवाद।
सप्रेम,
महेश सारांश सागर
(ज्ञानसागर परिवार)

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