एक बार स्वामी जी के आश्रम में एक व्यक्ति आया जो देखने में बहुत दुखी
लग रहा था । वह व्यक्ति आते ही स्वामी जी के चरणों में गिर पड़ा और बोला
कि महाराज मैं अपने जीवन से बहुत दुखी हूँ मैं अपने दैनिक जीवन में बहुत
मेहनत करता हूँ , काफी लगन से भी काम करता हूँ लेकिन कभी भी सफल नहीं हो
पाया। भगवान ने मुझे ऐसा नसीब क्यों दिया है कि मैं पढ़ा लिखा और मेहनती
होते हुए भी कभी कामयाब नहीं हो पाया हूँ। स्वामी जी ने थोड़ा सोचकर उस व्यक्ति के दिनचर्या के बारे में पूछा और
उसकी परेशानी को पल भर में ही समझ गए। उन दिनों स्वामी जी के पास एक छोटा सा पालतू कुत्ता था , उन्होंने उस
व्यक्ति से कहा – तुम कुछ दूर जरा मेरे कुत्ते को सैर करा लाओ फिर मैं
तुम्हारे सवाल का जवाब दूँगा !
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| तस्वीर AI द्वारा निर्मित है जो कहानी के उदाहरण मात्र के लिए है |
आदमी ने बड़े आश्चर्य से स्वामी जी की ओर देखा और फिर कुत्ते को लेकर
कुछ दूर निकल पड़ा । काफी देर तक अच्छी खासी सैर करा कर जब वो व्यक्ति
वापस स्वामी जी के पास पहुँचा तो स्वामी जी ने देखा कि उस व्यक्ति का
चेहरा अभी भी चमक रहा था जबकि कुत्ता हाँफ रहा था और बहुत थका हुआ लग
रहा था । स्वामी जी ने व्यक्ति से कहा - कि ये कुत्ता इतना ज्यादा कैसे
थक गया जबकि तुम तो हाँफ नही रहे और बिना थके दिख रहे हो तो व्यक्ति ने
कहा कि मैं तो सीधा साधा अपने रास्ते पे चल रहा था लेकिन ये कुत्ता गली
के सारे कुत्तों के पीछे भाग रहा था, उनपर भौंक रहा था और लड़कर फिर
वापस मेरे पास आ जाता था । हम दोनों ने एक समान रास्ता तय किया है
लेकिन फिर भी इस कुत्ते ने मेरे से कहीं ज्यादा दौड़ लगाई है इसीलिए ये
थक गया है ।
स्वामी जी ने मुस्कुरा कर कहा - यही तुम्हारे सभी प्रश्नों का जवाब है ,
तुम्हारी मंजिल तुम्हारे आस पास ही है वो ज्यादा दूर नहीं है लेकिन तुम
मंजिल पे जाने की बजाय दूसरे लोगों के पीछे भागते रहते हो और अपनी मंजिल
से दूर होते चले जाते हो। व्यक्ति ने जिज्ञासा दिखाते हुए पूछा कि आप
चाहते तो मुझ ऐसे ही बता सकते थे पर कुत्ते को घुमाने के बहाने संदेश
देने से क्या लाभ हुआ और आपने मुझे इसी तरीके से क्यों समझाया ? स्वामी
जी ने बताया कि सर्वप्रथम मैंने तुम्हारी दिनचर्या जानकार समझने की कोशिश
करी कि समस्या बाहरी है य आन्तरिक और तुम्हारे दिनचर्या से ये ज्ञात हो
गया कि तुम्हारी समस्या बाहरी नही बल्कि आंतरिक है , साथ ही आंतरिक
समस्या कई बार समझ य दिखाई नही देती है , इसके लिए एकांत य ध्यान के
माध्यम से आत्मविश्लेषण करना पड़ता है ! इसके अलावा ये कुत्ता भी बाहर
जाने के लिए कलप रहा था , पिपिया रहा था इसीलिए मैंने इस पालतू कुत्ते को
सैर कराने के लिए भेजा ताकि ये शिक्षा दी जा सके कि चंचल मन व् भटकाव से
लक्ष्य तक पहुंचना कई बार कठिन य असम्भव हो जाता है !
मित्रों यही बात हमारे दैनिक जीवन पर भी लागू होती है ! हम लोग हमेशा
दूसरों का पीछा करते रहते है कि वो डॉक्टर है तो मुझे भी डॉक्टर बनना है
,वो इंजीनियर है तो मुझे भी इंजीनियर बनना है ,वो ज्यादा पैसे कमा रहा है
तो मुझे भी कमाना है। तुलना करके अच्छे खासे जीवन व् दिनचर्या को बर्बाद
कर देते है व् इसी सोच की वजह से हम अपने हुनर को कहीं खो बैठते हैं और
जीवन एक संघर्ष मात्र बनकर रह जाता है , तो मित्रों दूसरों की होड़ मत करो
और अपनी मंजिल खुद बनाओ !! अपन लक्ष्य की और अग्रसर हो जाओ और जीवन में
सफल बनकर आदर्श उदाहरण बनो क्योंकि उदाहरण देने से अच्छा उदाहरण बनाना
श्रेष्ठ है !
ध्यान दे - कहानी में पालतू कुत्ता का उदाहरण पाठकों को
प्रेरित व् शिक्षा देने के उद्देश्य से है !!

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