एक शिक्षाप्रद कहानी - सबसे बड़ा धनुर्धर ! | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

एक शिक्षाप्रद कहानी  – सबसे बड़ा धनुर्धर

एक गाँव में एक युवा तीरंदाज रहता था। वह अपने कौशल पर इतना घमंडी हो चुका था कि स्वयं को सबसे बड़ा धनुर्धर मानने लगा था। जहाँ भी जाता, लोगों को मुकाबले की चुनौती देता, उन्हें हराता और फिर उनका उपहास करता। धीरे-धीरे उसका अहंकार उसकी पहचान बन गया।

एक दिन वह एक गाँव पहुँचा, जहाँ एक वृद्ध गुरु तीरंदाज रहते थे। युवक ने बिना सोचे-समझे उन्हें भी चुनौती दे डाली। गुरु ने पहले उसे प्रेमपूर्वक समझाने का प्रयास किया, परंतु युवक अपने अहंकार पर अड़ा रहा। अंततः गुरु ने चुनौती स्वीकार कर ली।

नियम के अनुसार युवक ने पहले निशाना साधा। उसने दूर रखे लक्ष्य के ठीक बीचों-बीच तीर मार दिया और पहले से लगे तीर को भी भेद डाला। यह देखकर वह दंभ से भर उठा और बोला -

“क्या आप इससे बेहतर कर सकते हैं?” गुरु मुस्कराए और शांत स्वर में बोले - “मेरे पीछे आओ।”

वे दोनों एक गहरी खाई के पास पहुँचे। दो पहाड़ियों के बीच लकड़ी का एक संकरा और अस्थायी पुल बना था। गुरु उसी पुल पर चल पड़े और बीचों-बीच पहुँचकर, बिना किसी भय के, दूर खड़े एक पेड़ के तने पर सटीक निशाना साधा।

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तस्वीर का इस्तेमाल समझाने के लिए किया गया व् AI द्वारा निर्मित है 

फिर गुरु ने युवक से कहा - “अब तुम भी अपनी दक्षता सिद्ध करो।”

युवक डरते हुए काँपते कदमों से पुल पर पहुँचा। उसके हाथ थरथरा रहे थे, मन में भय था। उसने तीर छोड़ा, पर तीर लक्ष्य के आसपास भी नहीं पहुँचा। युवक का सिर झुक गया। उसने अपनी हार स्वीकार कर ली।

तब गुरु ने उसे समझाते हुए कहा - “वत्स, तुमने तीर और धनुष पर तो नियंत्रण पा लिया है, लेकिन अपने मन पर नहीं।

तुमने अपनी सुविधा और सुरक्षित परिस्थिति में लक्ष्य साधा, जिससे यह सिद्ध हुआ कि तुम एक कुशल धनुर्धर हो।

पर जीवन में लक्ष्य हमेशा आसान नहीं होते - वे कठिन, जोखिमभरे और भय उत्पन्न करने वाले भी हो सकते हैं।

तुमने मेरी आयु और बाहरी रूप देखकर मुझे कम आँका, यह भूलकर कि नियमित साधना से ज्ञान और कौशल कभी नष्ट नहीं होते।

ज्ञान समुद्र की तरह अनंत है - उस पर पूर्ण अधिकार किसी का नहीं। जब तक सीखने की जिज्ञासा रहती है, तब तक ज्ञान बढ़ता रहता है;

लेकिन जैसे ही अहंकार आता है, पतन आरंभ हो जाता है।” युवक की आँखें खुल गईं। उसने गुरु के चरणों में गिरकर क्षमा माँगी और आजीवन सीखते रहने तथा अपनी क्षमता पर घमंड न करने की शपथ ली।

कहानी से मिलने वाली शिक्षा

  • केवल कौशल ही नहीं, मन पर नियंत्रण भी आवश्यक है।
  • अहंकार व्यक्ति की सबसे बड़ी कमजोरी बन जाता है।
  • ज्ञान और अनुभव उम्र या बाहरी रूप से नहीं आँके जा सकते।
  • जीवन के लक्ष्य हमेशा आसान नहीं होते—कठिन परिस्थितियों में ही वास्तविक क्षमता परखी जाती है।
  • सीखने की भावना हमें ऊँचा उठाती है, जबकि घमंड पतन की ओर ले जाता है।
👉 निष्कर्ष: ज्ञान का अहंकार विनाशकारी होता है, और विनम्रता ही सच्चे ज्ञान की पहचान है।
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