🌞दैनिक पंचांग🌞
🌥️ दिनांक - 23 अप्रैल 2026
🌥️ दिन - गुरुवार
🌥️ विक्रम संवत् - 2083
🌥️ संवत्सर - विश्वावसु
🌥️ अयन - उत्तरायण
🌥️ ऋतु - ग्रीष्म
🌥️ मास - वैशाख
🌥️ पक्ष - शुक्ल
🌥️ सूर्य राशि - मेष
🌥️ चंद्र राशि - मिथुन दिन 03:13 तक तद्पश्चात कर्क
🌥️ सूर्योदय - 05:52
🌥️ सूर्यास्त - 06:43
(समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️तिथि - सप्तमी रात्रि 08:49 तक तद्पश्चात अष्टमी
🌥️नक्षत्र - पुनर्वसु रात्रि 08:57 तक तद्पश्चात पुष्य
🌥️योग - सुकर्मा प्रातः 06:08 तक तद्पश्चात धृति रात्रि 03:32 अप्रैल 24 तक तद्पश्चात शूल
🌥️राहुकाल - दिन 01:54 से दिन 03:30 तक
🌥️भद्रावास 👉🏻 मृत्यु - रात्रि 08:49 से प्रातः 08:01 अप्रैल 24 तक
🌥️सर्वार्थसिद्धि योग 👉🏻 प्रातः 05:52 से प्रातः 05:52 अप्रैल 24 तक
🌥️गुरुपुष्य योग 👉🏻 रात्रि 08:57 से प्रातः 05:52 अप्रैल 24 तक
🌥️दिशा शूल 👉🏻 दक्षिण दिशा में
🌥️अग्निवास: 👉🏻 आकाश/पाताल- अशुभ
🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 पश्चिम, उत्तर
🌥️शिववास: 👉🏻 भोजन में - पीणा रात्रि 08:49 तक तद्पश्चात श्मशान में - पीणा
🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:23 से प्रातः 05:08 तक
🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:52 से दिन 12:43 तक
🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:55 से रात्रि 12:39 अप्रैल 24 तक
⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- भद्रावास, सर्वार्थसिद्धि योग, अमृतसिद्धि योग, गुरुपुष्य योग, गंगा सप्तमी (गंगोत्पत्ति), चित्रगुप्त प्राकट्योत्सव
🔻पद, चरण🔻
(नामकरण हेतु नामाक्षर सूचक)
2 को→ पुनर्वसु 09:31AM तक
3 हा→ पुनर्वसु 03:13 PM तक
4 ही→ पुनर्वसु 08:57 PM तक
1 हु→ पुष्य 02:43 AM अप्रैल 24 तक
🔶 चौघड़िया, दिन 🔶
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)
शुभ 05:52 से 07:29 तक उत्तम
रोग 07:29 से 09:05 तक अमंगल
उद्वेग 09:05 से 10:41 तक अशुभ
चर 10:41 से 12:18 तक सामान्य
लाभ 12:18 से 01:54 तक उन्नति
अमृत 01:54 से 03:30 तक सर्वोत्तम
काल 03:30 से 05:06 तक हानि
शुभ 05:06 से 06:43 तक उत्तम
🔶 चौघड़िया, रात 🔶
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)
अमृत 18:43 से 20:06 तक सर्वोत्तम
चर 20:06 से 21:30 तक सामान्य
रोग 21:30 से 22:54 तक अमंगल
काल 22:54 से 24:17 तक हानि
लाभ 24:17 से 25:41 तक उन्नति
उद्वेग 25:41 से 27:04 तक अशुभ
शुभ 27:04 से 28:28 तक उत्तम
अमृत 28:28 से 29:52 तक सर्वोत्तम
🌥️विशेष - सप्तमी को ताड़ फल खाने से रोग बढ़ता है व शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
पञ्चाङ्ग निर्माता पं. श्री दीपेश शास्त्री जी
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