Aaj Ka Panchang | Aaj Ki Tithi | आज का पंचांग | आज की तिथि | 30th April 2026

Aaj Ka Panchang | Aaj Ki Tithi | आज का पंचांग | आज की तिथि | 30th April 2026


🌞दैनिक पंचांग🌞

🌥️ दिनांक - 30 अप्रैल 2026
🌥️ दिन - गुरुवार
🌥️ विक्रम संवत् - 2083
🌥️ संवत्सर - विश्वावसु
🌥️ अयन - उत्तरायण
🌥️ ऋतु - ग्रीष्म
🌥️ मास - वैशाख
🌥️ पक्ष - शुक्ल
🌥️ सूर्य राशि - मेष
🌥️ चंद्र राशि - कन्या दोपहर 01:14 तक तद्पश्चात तुला
🌥️ सूर्योदय - 05:47
🌥️ सूर्यास्त - 06:46
(समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️तिथि - चतुर्दशी रात्रि 09:12 तक तद्पश्चात पूर्णिमा
🌥️नक्षत्र - चित्रा रात्रि 02:16 मई 01 तक तद्पश्चात स्वाति
🌥️योग - वज्र रात्रि 08:55 तक तद्पश्चात सिद्धि
🌥️राहुकाल - दिन 01:54 से दिन 03:31 तक
🌥️भद्रावास 👉🏻 पाताल→ रात्रि 09:12 से सुबह 10:00 मई 01 तक
🌥️दिशा शूल 👉🏻 दक्षिण दिशा में
🌥️अग्निवास: 👉🏻 पृथ्वी - शुभ रात्रि 09:12 तक तद्पश्चात आकाश- अशुभ
🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 दक्षिण, पश्चिम
🌥️शिववास: 👉🏻 भोजन में - पीणा रात्रि 09:12 तक तद्पश्चात श्मशान में - मृत्युकारक
🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:19 से प्रातः 05:03 तक
🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:51 से दिन 12:42 तक
🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:54 से रात्रि 12:38 मई 01 तक
⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- भद्रावास, रवि योग, नरसिंह जयंती, नरसिंह चतुर्दशी, छिन्नमस्ता जयंती

🔻पद, चरण🔻
(नामकरण हेतु नामाक्षर सूचक)

1 पे→ चित्रा 06:44 AM तक
2 पो→ चित्रा 01:14 PM तक
3 रा→ चित्रा 07:44 PM तक
4 री→ चित्रा 02:16 AM तक

🔶 चौघड़िया, दिन 🔶  
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)

शुभ 05:47 से 07:25 तक उत्तम  
रोग 07:25 से 09:02 तक अमंगल  
उद्वेग 09:02 से 10:39 तक अशुभ  
चर 10:39 से 12:16 तक सामान्य  
लाभ 12:16 से 01:54 तक उन्नति  
अमृत 01:54 से 03:31 तक सर्वोत्तम  
काल 03:31 से 05:08 तक हानि  
शुभ 05:08 से 06:46 तक उत्तम  

🔶 चौघड़िया, रात 🔶  
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)

अमृत 06:46 से 08:08 तक सर्वोत्तम  
चर 08:08 से 09:31 तक सामान्य  
रोग 09:31 से 10:54 तक अमंगल  
काल 10:54 से 12:16 तक हानि  
लाभ 12:16 से 01:39 तक उन्नति  
उद्वेग 01:39 से 03:01 तक अशुभ  
शुभ 03:01 से 04:24 तक उत्तम  
अमृत 04:24 से 05:47 तक सर्वोत्तम              

🌥️विशेष - चतुर्दशी के दिन स्त्री - सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)

पञ्चाङ्ग निर्माता पं. श्री दीपेश शास्त्री जी

वेद, पुराण एवं शास्त्रोक्त किसी भी प्रकार की समस्या के निदान हेतु अथवा परामर्श हेतु सम्पर्क करें।




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