Aaj Ka Panchang | Aaj Ki Tithi | आज का पंचांग | आज की तिथि | 1st May 2026

Aaj Ka Panchang | Aaj Ki Tithi | आज का पंचांग | आज की तिथि | 1st May 2026


🌞दैनिक पंचांग🌞

🌥️ दिनांक - 01 मई 2026
🌥️ दिन - शुक्रवार
🌥️ विक्रम संवत् - 2083
🌥️ संवत्सर - विश्वावसु
🌥️ अयन - उत्तरायण
🌥️ ऋतु - ग्रीष्म
🌥️ मास - वैशाख
🌥️ पक्ष - शुक्ल
🌥️ सूर्य राशि - मेष
🌥️ चंद्र राशि - तुला
🌥️ सूर्योदय - 05:47
🌥️ सूर्यास्त - 06:46
(समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️तिथि - पूर्णिमा रात्रि 10:52 तक तद्पश्चात प्रतिपदा
🌥️नक्षत्र - स्वाति रात्रि 04:35 मई 02 तक तद्पश्चात बिशाखा
🌥️योग - सिद्धि रात्रि 09:13 तक तद्पश्चात व्यतिपात
🌥️राहुकाल - दिन 10:39 से दिन 12:16 तक
🌥️भद्रावास 👉🏻 पाताल→ सुबह 10:00 तक
🌥️दिशा शूल 👉🏻 पश्चिम दिशा में
🌥️अग्निवास: 👉🏻 पाताल - अशुभ रात्रि 10:52 तक तद्पश्चात पृथ्वी - शुभ
🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 पश्चिम
🌥️शिववास: 👉🏻 श्मशान में - मृत्युकारक रात्रि 10:52 तक तद्पश्चात गौरी के साथ - शुभ
🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:18 से प्रातः 05:03 तक
🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:50 से दिन 12:42 तक
🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:54 से रात्रि 12:38 मई 02 तक
⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- भद्रावास, आडल योग, अन्वाधान, कूर्म जयंती, बुद्ध पूर्णिमा, चित्रा पूर्णनामी, अंतराष्ट्रीय श्रमिक दिवस, वैशाख पूर्णिमा, वैशाख पूर्णिमा व्रत

🔻पद, चरण🔻
(नामकरण हेतु नामाक्षर सूचक)

1 रू→ स्वाति 08:49 AM तक
2 रे→ स्वाति 03:23 PM तक
3 रो→ स्वाति 09:59 PM तक
4 ता→ स्वाति 04:35 AM मई 02 तक

🔶 चौघड़िया, दिन 🔶  
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)

चर 05:47 से 07:24 तक सामान्य  
लाभ 07:24 से 09:01 तक उन्नति  
अमृत 09:01 से 10:39 तक सर्वोत्तम  
काल 10:39 से 12:16 तक हानि  
शुभ 12:16 से 01:54 तक उत्तम  
रोग 01:54 से 03:31 तक अमंगल  
उद्वेग 03:31 से 05:09 तक अशुभ  
चर 05:09 से 06:46 तक सामान्य  

🔶 चौघड़िया, रात 🔶  
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)

रोग 06:46 से 08:09 तक अमंगल  
काल 08:09 से 09:31 तक हानि  
लाभ 09:31 से 10:54 तक उन्नति  
उद्वेग 10:54 से 12:16 तक अशुभ  
शुभ 12:16 से 01:38 तक उत्तम  
अमृत 01:38 से 03:01 तक सर्वोत्तम  
चर 03:01 से 04:23 तक सामान्य  
रोग 04:23 से 05:46 तक अमंगल                

🌥️विशेष - पूर्णिमा के दिन स्त्री - सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)

पञ्चाङ्ग निर्माता पं. श्री दीपेश शास्त्री जी

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