🌞दैनिक पंचांग🌞
🌥️दिनांक - 07 अप्रैल 2026
🌥️दिन - मंगलवार
🌥️विक्रम संवत् - 2083
🌥️संवत्सर - विश्वावसु
🌥️अयन - उत्तरायण
🌥️ऋतु - बसंत
🌥️मास - वैशाख
🌥️पक्ष - कृष्ण
🌥️सूर्य राशि - मीन
🌥️चंद्र राशि - वृश्चिक प्रातः 05:54 अप्रैल 8 तक तद्पश्चात धनु
🌥️सूर्योदय - 06:06
🌥️सूर्यास्त - 06:37 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️तिथि - पंचमी दिन 04:34 तक तद्पश्चात षष्ठी (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️नक्षत्र - ज्येष्ठा प्रातः 05:54 अप्रैल 08 तक तद्पश्चात मूल (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️योग - व्यतिपात दिन 04:17 तक तद्पश्चात वरीयान (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️राहुकाल - दिन 03:29 से दिन 05:03 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️गण्ड मूल 👉🏻 (अहोरात्रि) 09 अप्रैल प्रातः 08:48 तक
🌥️दिशा शूल 👉🏻 उत्तर दिशा में
🌥️अग्निवास: 👉🏻 पृथ्वी - शुभ दिन 04:34 तक तद्पश्चात आकाश - अशुभ
🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 उत्तर
🌥️शिववास: 👉🏻 नंदी पर - अभिष्टसिद्धि दिन 04:34 तक तद्पश्चात भोजन में - पीणा
🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:34 से प्रातः 05:20 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:56 से दिन 12:46 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:58 से रात्रि 12:44 अप्रैल 08 तक (नर्मदापुरम मानक समयानुसार)
⛅व्रत, पर्व आदि विवरण - गण्ड मूल, विश्व बंजारा दिवस
🔻पद, चरण🔻
(नामकरण हेतु नामाक्षर सूचक)
1 नो→ ज्येष्ठा 09:40 AM तक
2 या→ ज्येष्ठा 04:25 PM तक
3 यी→ ज्येष्ठा 11:09 PM तक
4 यू→ ज्येष्ठा 05:54 AM अप्रैल 08 तक
🔶चोघडिया, दिन🔶
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)
रोग 06:15 से 07:49 तक अशुभ
उद्वेग 07:49 से 09:22 तक अशुभ
चर 09:22 से 10:56 तक शुभ
लाभ 10:56 से 12:29 तक शुभ
अमृत 12:29 से 14:03 तक शुभ
काल 14:03 से 15:36 तक अशुभ
शुभ 15:36 से 17:10 तक शुभ
रोग 17:10 से 18:43 तक अशुभ
🔶चोघडिया, रात🔶
(शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी)
काल 18:43 से 20:10 तक अशुभ
लाभ 20:10 से 21:36 तक शुभ
उद्वेग 21:36 से 23:02 तक अशुभ
शुभ 23:02 से 24:29 तक शुभ
अमृत 24:29 से 25:55 तक शुभ
चर 25:55 से 27:21 तक शुभ
रोग 27:21 से 28:48 तक अशुभ
काल 28:48 से 30:14 तक अशभ
🌥️विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। एवं षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातून मुंह मे डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
पञ्चाङ्ग निर्माता पं. श्री दीपेश शास्त्री जी
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